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कोरोना से बैकफुट पर गया प्रिटिंग कारोबार

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बागेश्वर। कोरोना की मार से प्रिंटिंग कारोबार भी मिटने लगा है। कोविड कर्फ्यू के कारण प्रिंटिंग प्रेस का कार्य कई माह से बंद है। कोरोना काल में स्कूल बंद रहने और सीमित विवाह कार्यक्रमों से भी प्रिंटिंग व्यवसाय कम हो गया है। टैक्स भरना भी व्यवसायियों के लिए मुश्किल हो रहा है। वहीं इनमें काम करने वाले कर्मचारी आर्थिक परेशानियों का सामना करने को मजबूर हैं। प्रिंटिंग प्रेस संचालकों ने सरकार से जीएसटी और बैंक के ब्याज में छूट देने के साथ ही कामगारों को राहत राशि प्रदान करने की मांग की है।
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पिछले साल से प्रिंटिंग कारोबार ठप है। स्कूल बंद हैं। 18 कामगारों का वेतन तक निकालना मुश्किल हो गया है। सरकार उन्हें कोई मदद न दे लेकिन कामगारों को तो कुछ मदद सरकार ने देनी चाहिए। कामगारों के वेतन खाते में मदद मिलनी चाहिए।
- दलीप सिंह खेतवाल
कोरोना काल में प्रिंटिंग प्रेस का कार्य चौपट हो गया है। प्रेस संचालकों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। घर में रखी जमा पूंजी से परिवार का खर्चा चल रहा है। बिजली, पानी का बिल, मकान, दुकान का किराया देना भी मुश्किल हो गया है।
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- नवीन लोहनी
कोरोना के कारण प्रिंटिंग का काम न के बराबर रह गया है। दो साल में लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। किराया दे पाना भी मुश्किल हो गया है। आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। प्रिंट व्यवसायियों को जीएसटी में छूट प्रदान करनी चाहिए।
- नवीन जोशी
कोरोना के कारण स्कूल बंद होने और सीमित मात्रा में विवाह कार्यक्रम होने से प्रिंटिंग कारोबार बहुत पीछे चला गया है। कोरोना की दूसरी लहर के बाद छपाई का कार्य बंद है। सरकार प्रिंटिंग प्रेस संचालकों की हालत को देखते हुए जीएसटी में छूट मिलनी चाहिए।
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-अशोक खेतवाल
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