बीएसएनएल के अधिकारियों का घेराव करते ग्रामीण।
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टावर लगने के बाद भी संचार सेवाओं को लाभ नहीं मिलने से नाराज बाछम के ग्रामीणों ने बीएसएनएल के अधिकारियों का घेराव किया। ग्रामीणों का कहना था कि 24 घंटे फोन में सिग्नल नहीं आने से आपात स्थिति में उन्हें संचार संपर्क के लिए कर्मी या फिर तहसील मुख्यालय कपकोट जाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बीएसएनएल द्वारा धूर में लगाया गया टावर अधिकांश दिनों शोपीस बना रहता है। सिग्नल गायब रहते हैं, यदि किसी दिन सिग्नल आए भी तो शाम होते ही नेटवर्क गायब हो जाता है। रात को कभी भी मोबाइल फोन में सिग्नल नहीं आते हैं। उन्हें आपात स्थिति में किसी तरह की सूचना देने के लिए कर्मी जाना पड़ता है।
कर्मी में भी नेटवर्क नहीं होने पर तहसील मुख्यालय जाने को मजबूर होना पड़ता है। मोबाइल टावर के बंद होने की शिकायत करने पर जेनरेटर चलाने के लिए डीजल नहीं होने की बात कही जाती है। ग्रामीण रतन सिंह, शेर सिंह, दिगंबर, तारा सिंह आदि ने बीएसएनएल के अधिकारियों से मोबाइल टावर का संचालन 24 घंटे करने की मांग उठाई।
कहा कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो उन्हें आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। बीएसएनएल के उपखंड अधिकारी फराज खान ने बताया कि बिजली की व्यवस्था नहीं होने से मोबाइल टावर का संचालन जेनरेटर से किया जा रहा है। ऐसे में 24 घंटे टावर संचालित नहीं किया जा सकता है। जैसे ही बिजली सुचारु होगी इस तरह की समस्या नहीं रहेगी।