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सरयू पर लकड़ी के 10 अस्थायी पैदल पुल बने 

Sat, 28 Oct 2017 10:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कपकोट (बागेश्वर)।
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अस्‍थ्‍ाायी पुल। - फोटो : amar ujala
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सहस्रधारा जाने के लिए भद्रतुंगा से आगे न तो पैदल रास्ता है और न ही सरयू नदी पर कोई पैदल पुल ही बने हैं। वहां तक जाने के लिए श्रद्धालुओं को कम से कम 16 बार नदी के आरपार जाना पड़ता है। वर्षाकाल में सरयू के उफनाने से आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है।
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विधायक बलवंत भौर्याल ने अपनी निधि से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सरयू पर लकड़ी के अस्थायी पैदल पुलों और रास्ता बनाने का काम शुरू करवा दिया है। वहां अब तक 10 पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि अन्य पुलों और पैदल रास्ते का निर्माण शीघ्र पूरा होने की संभावना है। इन पुलों के बनने से श्रद्धालु अब बरसात से पहले तक आसानी से सहस्रधारा आ जा सकेंगे। 

बता दें कि कपकोट ब्लॉक के झूनी ग्राम पंचायत में स्थित पहाड़ी से पतित पावनी सरयू नदी निकलती है। इस स्थल को सरमूल भी कहा जाता है, लेकिन इस पवित्र स्थल तक जाने के लिए पैदल रास्ता तक नहीं है। बहुत कम लोग दुर्गम पहाड़ी पर उगी झाड़ियों को पकड़कर बमुश्किल ही पहुंच पाते हैं।
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सरमूल से सरयू छोटी-छोटी सौ धाराओं में निकलकर अविरल बहना शुरू करती है। जिस स्थल पर मां सरयू धरती पर उतरती हैं उस जगह को सौधारा कहते हैं और वहां सरयू मैया का मंदिर बनाया गया है। यहां वैशाखी पूर्णिमा का मेला लगता है। शिव पुराण में सहस्रधारा का वर्णन है। लोग अपने पितरों के निमित्त यहां श्राद्ध तर्पण करते हैं और बच्चों के जनेऊ संस्कार भी होते हैं।

क्षेत्र के लोग इस क्षेत्र को प्रमुख तीर्थस्थल बनाने के अलावा सरयू के संरक्षण के लिए गंगा की तर्ज पर सरयू विकास प्राधिकरण बनाने की मांग करते रहे हैं। बीती 22 और 23 जून को महंत देवानंद दास के नेतृत्व में दयाल कुमल्टा आदि ने सरमूल की पैदल यात्रा की। इसके बाद महंत के नेतृत्व में ही इस मांग को लेकर बागेेश्वर से सौधारा और फिर वहां से बागेश्वर तक की पदयात्रा की गई।

इसमें भगवत कोरंगा समेत बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग शामिल हुए। शिक्षक दयाल कुमल्टा सरयू की महत्ता को लेकर इन दिनों डॉक्यूमेंट्री भी तैयार कर रहे हैं। कुमल्टा के अनुसार विधायक भौर्याल की निधि से अब तक सरयू पर लकड़ी के 10 अस्थायी पैदल तैयार हो चुके हैं, जबकि करीब छह पुलों और पैदल रास्ते का निर्माण प्रगति पर है।

महंत देवानंद ने बताया कि यदि सरयू को सरकार को उत्तराखंड के प्रमुख धामों के रूप में विकसित करे तो इससे जहां सरयू को न केवल संरक्षण मिलेगा, वहीं कई खाली हाथों को रोजगार भी मिलेगा। इससे पलायन पर भी काफी हद तक अंकुश लग सकेगा। 

कोश्यारी के आने से विकास की उम्मीद 
विधायक बलवंत भौर्याल के मुताबिक पूर्व सीएम और नैनीताल के सांसद भगत सिंह कोश्यारी एक नवंबर को सहस्रधारा (सौधारा) की पैदल यात्रा पर आ रहे हैं। वह वहां पूजा-अर्चना करेंगे। उनके कार्यक्रम से सरमूल क्षेत्र के धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित होने की संभावना बढ़ गई है। दीगर हो कि इस मामले में कोश्यारी पिछले दिनों मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से चर्चा भी कर चुके हैं। 
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