कपकोट में मछली पालको को ब्लैक तिलापिया मछली के बीज देते मत्स्य विभाग के कार्मिक। स्रोत- मत्स्य
बागेश्वर। जिला मछली पालन के क्षेत्र में लगातार तरक्की कर रहा है। कार्प और ट्राउट के सफल उत्पादन के बाद अब जिले में ब्लैक तिलापिया मछली पालन शुरू किया गया है। मत्स्य विभाग ने छत्तीगढ़ से बीज मंगाकर 150 मछली पालकों को वितरित किए हैं। अक्तूबर में मछली ग्राहकों तक पहुंचने की उम्मीद है।
ब्लैक तिलापिया को ब्लैकचिन तिलापिया या सरोथेरोडोन मेलानोथेरॉन नाम से भी जाना जाता है। मुख्यत: यह मछली पश्चिमी अफ्रीका के तटीय क्षेत्रों और उत्तरी अमेरिका में पाई जाती है। देश के मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इसका पालन किया जाता है। ब्लैक तिलापिया की प्रजनन और वृद्धि दर तेज होती है। छह महीने में इसका वजन एक किलोग्राम तक बढ़ने से इसकी उपज बेहतर होती है।
कम ऑक्सीजन वाले पानी में भी आसानी से जिंदा रहने वाली यह मछली प्रोटीन और ओमेगा थ्री का अच्छा स्रोत है। कम रखरखाव और तेजी से बढ़ने के चलते इसे गरीबों की मछली भी कहा जाता है। बाजार में मछली 300 से 350 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिकती है। संवाद
इनसेट
तीनों ब्लॉकों में चल रहा ट्रायल
वरिष्ठ मत्स्य निरीक्षक मनोज मियान ने बताया कि जिले के तीनों विकासखंडों में मछली पालन किया जाता है। कपकोट क्षेत्र में ट्राउट मछली का सालाना करीब 60 क्विंटल उत्पादन हो रहा है। गर्म घाटी वाले क्षेत्रों में सिल्वर कार्प और ग्रीन कार्प मछली पाली जाती है। ब्लैक तिलापिया भी गर्म घाटी वाले क्षेत्रों में होती है। इसके चलते विभाग ने तीनों ही विकासखंडों के मछली पालकों को इसके बीज वितरित किए हैं।
कोट
पहली बार जिले में ब्लैक तिलापिया मछली के बीज मंगाकर मछली पालकों को बांटे गए हैं। यहां की जलवायु इन मछलियों के रहने के लिए उपयुक्त है। आगामी चार महीनों के भीतर मछली पालकों को लाभ मिलने लगेगा। - मनोज मियान, वरिष्ठ मत्स्य निरीक्षक, बागेश्वर