‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।’ इसे साबित कर दिखाया मुंबई निवासी 40 वर्षीय अम्लान दत्ता ने।
एक पैर से विकलांग होने के बावजूद वे पिंडारी ग्लेशियर के दुर्गम ट्रेकिंग रूट से बसुधारा (पकुवा बुग्याल) तक पहुंच गए। जबकि इस रूट पर स्वस्थ लोग भी बहुत सोच-विचारकर आगे कदम बढ़ाते हैं। बैसाखी के जरिए उन्होंने 58 किमी की दूरी चार दिन में पूरी की।
40 वषीय अम्लान दत्ता मुंबई में आनंद बाजार पत्रिका में फोटोग्राफर हैं। कुछ साल पहले एक हादसे में उनका दायां पैर घुटने से नीचे कट गया था। विकलांग होने के बावजूद उनमें गजब का जज्बा है। बताते हैं कि जब उन्होंने ट्रेकिंग की इच्छा जताई तो शुरू में सभी ने मजाक समझा।
उन्हें समझाया, लेकिन उनका जज्बा देख उनकी पत्नी और बेटे ने उन्हें ट्रेकिंग पर ले जाने की ठान ली। पत्नी, बेटे समेत 15 लोगों के ग्रुप के साथ वे मुंबई से निकल पड़े। आठ मई को लोहारखेत से उन्होंने पदयात्रा शुरू की। यह लोग फुरकिया होते हुए पिंडारी ग्लेशियर के दुर्गम ट्रेकिंग रूट से खाती तक गए।
यहां से पकुवा बुग्याल के पास पांगू के बसुधारा नामक खूबसूरत स्थल तक का भ्रमण करने के बाद 12 मई को वापस खाती होते हुए खरकिया आए। उसके बाद यहां से वाहन के जरिए बागेश्वर पहुंचे। श्री दत्ता ने बताया कि रास्ते में कंक्रीट होने के कारण बैसाखी के सहारे चलने में कुछ दिक्कतें हुई, लेकिन जज्बा हो तो कोई काम मुश्किल नहीं।
कहते हैं कि उत्तरांखड जितना सुंदर है, यहां की यात्रा भी उतनी ही सुरक्षित है। उन्हें कहीं किसी तरह की समस्या नहीं आयी। उन्होंने संकल्प लिया कि अगले साल पिंडारी ग्लेशियर की ट्रेकिंग के लिए आएंगे।
वापसी में श्री दत्ता ने खाती जीआईसी में 100 छात्र-छात्राओं को अपनी ओर से पेेंसिल, पैन, रबर, रुलर, इरेजर, ज्योमैटिकल बाक्स आदि वितरित कीं।