2023 में 420 क्षय रोगियों में से 377 मरीज हुए ठीक
जिले के अधिकतर क्षय रोगियों को है पल्मोनरी टीबी
बागेश्वर। जिले में टीबी मरीजों की संख्या घट रही है। 2022 में 413, 2023 में 388 टीबी के मरीज सामने आए। सुकून की बात है कि अधिकांश मरीज इलाज के बाद ठीक हो रहे हैं। अस्पताल और सीएचसी में बने टीबी सेंटरों में मरीजों की निशुल्क जांच और उपचार किया जा रहा है।
जिला अस्पताल के टीबी सेंटर से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में टीबी के 420 मरीजों में से 377 मरीज स्वस्थ हो गए हैं। वहीं, छह मरीजों का स्वास्थ्य अधिक बिगड़ने पर उन्हें डीआरडीपी सेंटर हल्द्वानी रेफर करना पड़ा। वर्तमान में अस्पताल में 66 मरीज पल्मोनरी टीबी (टीबी बैक्टीरिया फेफड़ों को संक्रमित करता है) और 48 मरीज एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी (टीबी बैक्टीरिया ब्रेन, लिवर, पेट, गले आदि को प्रभावित करता है) की चपेट में हैं। जिले के अधिकतर क्षय रोगी पल्मोनरी टीबी से ग्रसित हैं।
महिलाओं की अपेक्षा पुरुष अधिक क्षय रोगी
बागेश्वर। पिछले दो वर्षों के आंकड़ों से पता चला है कि जिले के क्षय रोगियों में पुरुषों की संख्या अधिक है। 2022 में 413 मरीजों में 275 पुरुष और 138 महिलाएं, 2023 में 388 मरीजों में 274 पुरुष और 114 महिलाएं, 2024 में 124 मरीजों में 78 पुरुष और 46 महिलाएं टीबी पॉजीटिव मिले। संवाद
मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था नहीं है
बागेश्वर। टीबी एक संक्रमित बीमारी है जो एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे को फैलती है। अन्य जिलों के टीबी सेंटर में मरीजों को भर्ती करने की सुविधा भी उपलब्ध है लेकिन इस जिले में अभी तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बन पाई है। मरीजों को मजबूरन घर में रहना पड़ता है। मरीज के भर्ती होने के स्थिति में जिला अस्पताल में अन्य मरीजों के बीच ही उन्हें भर्ती किया जाता है। संवाद
कोट-क्षय रोगियों का निशुल्क इलाज किया जाता है। जिले में क्षय रोगियों की संख्या में निरंतर कमी आ रही है। इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जाता है। -डॉ. हरीश पोखरिया, जिला क्षय रोग अधिकारी, बागेश्वर।