बागेश्वर को जिन पवित्र नदियों से पहचान मिली यहां पर उन्हीं का सम्मान नहीं है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण भागीरथी नाला है। यह ऐसा नाला है जिसमें सैकड़ों घरों की गंदगी डाली जाती है। यह गंदगी नीचे आकर पवित्र संगम स्थल से महज 50 मीटर की दूरी पर पतित पावनी सरयू नदी में समां जाती है।
बागनाथ मंदिर के समीप से होकर बहने वाली सरयू और गोमती नदियां बागेश्वर की सबसे बड़ी पहचान हैं। मार्कंडेय ऋषि की तपो स्थली के निकट सरयू में मिलने वाले भागीरथी नाले को कुछ लोग विलुप्त सरस्वती के रूप में मान्यता देते हैं। इस त्रिवेणी संगम स्थल पर हजारों लोग देश के कोने-कोने से स्नान के लिए आते हैं।
लेकिन सरयू, गोमती के साथ ही भागीरथी अब पूरी तरह से गंदे नाले में तब्दील हो गई है। गांव की ऊंची पहाड़ी से निकलने वाले इस नाले का निर्मल पानी नगरीय क्षेत्र शुरू होते ही दूषित हो जाता है। लोग अपने घरों का कूड़ा इसी नाले में डालते हैं। कुछ घरों का सीवर और गंदा पानी सीधे इसी में गिरता है। यह गंदगी सीधे सरयू में मिलती है।
यह गंदगी सरयू में उस स्थान पर मिलती है जहां से पवित्र स्थल की दूरी 50-60 मीटर है। हजारों लोगों की आस्था और भागीरथी नाले को बचाने के लिए आज तक कोई प्रयास नहीं किए गए। प्रशासन की ओर से भागीरथी नाले के निकट रहने वाली आबादी को न तो सुविधा उपलब्ध कराई गई और न ही घरों का कूड़ा-करकट और गंदगी नाले में बहाने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई।