साक्षर भारत कार्यक्रम को बंद करने से नाराज प्रेरकों ने जिला मुख्यालय में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया और प्रदेश सरकार का पुतला फूंका। प्रेरकों ने कहा कि सरकार के इस निर्णय से उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है।
पूर्व निर्धारित चेतावनी के तहत जिले भर से आए प्रेरक नुमाइशखेत मैदान में एकत्र हुए। यहां से जुलूस की शक्ल में एसबीआइ तिराहे पर पहुंचकर प्रदेश सरकार का पुतला दहन किया। इसके बाद तहसील परिसर पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की और धरने पर बैठ गए।
प्रेरक संगठन की जिलाध्यक्ष शांति धपोला की अध्यक्षता में धरना स्थल पर आयोजित सभा में प्रेरकों ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2010 से निरक्षरता को दूर करने में प्रेरकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रेरकों के प्रयासों से ही साक्षरता दर 62 से बढ़कर 80 प्रतिशत हुई है।
प्रेरकों ने मात्र दो हजार रुपये के मानदेय में भी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ पूरा किया। इसके बावजूद प्रदेश के 5155 प्रेरकों को हटा दिया गया है। वक्ताओं ने कहा कि प्रेरकों को पिछले 19 माह का मानदेय तक नहीं दिया गया है। मानदेय नहीं मिलने और अब योजना को बंद करने से प्रेरकों के सामने घोर संकट पैदा हो गया है।
सभी प्रेरकों ने उन्हें किसी अन्य योजना से जोड़ने की मांग उठाई। कहा कि यदि उनकी उपेक्षा की गई तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा। इसके बाद प्रेरक संगठन ने जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे।
धरना प्रदर्शन करने वालों में हरीश रावत, आशा, रमेश चंद्र, बहादुर सिंह, नीमा जोशी, नवीन चंद्र, गोविंद बल्लभ, धीरेंद्र कुमार, महेश मिश्रा, जानकी, दीपा, कमला, पूनम, रेखा, लक्ष्मण भाकुनी, नंदन रौतेला आदि प्रेरक शामिल थे।