कपकोट (बागेश्वर)। शिखर पर्वत पर स्थित श्री श्री 1008 मूल नारायण मंदिर और चिरपतकोट स्थित श्री श्री 1008 गुरु गोसाईं देव और माता भगवती का मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हैं। दोनों मंदिर मनोरम पहाड़ी पर स्थित हैं। दोनों स्थल आज तक यातायात से नहीं जुड़ सके हैं। विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने इन दोनों स्थलों को शीघ्र सड़क से जोडने की मांग की है।
समुद्र सतह से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित शिखर पर्वत पर श्री श्री 1008 मूल नारायण भगवान का मंदिर है। बांज, बुंराश समेत कई अन्य पेड़ों के झुरमुटों के बीच वहां भव्य मंदिर है। यहां जल का भूमिगत स्रोत है। वहां से हिमालय की लंबी श्रृंखला के साथ ही गढ़वाल, पिथौरागढ़ और नेपाल की पर्वतमाला भी दिखाई देती है। कपकोट-शामा मोटर मार्ग से मंदिर की दूरी छह किमी है।
इसी तरह कपकोट कर्मी सड़क से करीब छह किमी दूर चिरपतकोट की खड़ी चढ़ाई पर गुरु गोसाईं देेव और भगवती माता का गगनचुंबी मंदिर है। वहां से हिमालय की लंबी श्रृंखला के साथ ही कलकल बहती सरयू की मनोरम धारा दिखाई देती हैं। मंदिर के दर्शन और पूजन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं।
मंदिर को डोटिला से रोपवे और अग्रणी चीराबगड़-पोथिंग-उच्छात सड़क से जोड़ा जा सकता है। दोनों मंदिर बिजली लाइन से भी नहीं जुड़े हैं। लोगों का कहना है कि यातायात की सुविधा होने पर वहां लोगों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे रोजगार के भी अवसर बढेंगें। विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने विधायक बलवंत भौर्याल से मंदिरों को सड़क से जोड़ने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। मांग करने वालों में सभासद गिरीश जोशी, जमन सिंह बिष्ट, आनंद बिष्ट, सतीश जोशी, हयात गढ़िया, महिपाल कोरंगा, ग्राम प्रधान पार्वती देवी, बीडीसी सदस्य नंदी देवी, पूर्व प्रधान गोविंद कोरंगा आदि शामिल हैं।