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उत्तर रेलवे का का 60 सदस्यीय दल पिंडारी ग्लेशियर की ट्रैकिंग कर लौटा

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पिंडारी ग्लेशियर ट्रैकिंग से लौटा उत्तर रेलवे के ट्रैकरों का दल। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। उत्तर रेलवे का 60 सदस्यीय ट्रैकरों का दल पिंडारी ग्लेशियर की सफल यात्रा कर लौट आया है। दल में कई प्रदेशों के ट्रैकर शामिल थे। सबसे कम 13 वर्ष के ट्रैकर राजस्थान के अलवर निवासी जतिन और सबसे उम्रदराज 59 वर्ष के ट्रैकर उदय सिंह रतलाम के थे।
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उत्तर रेलवे ट्रैकिंग एवं माउंटेनियरिंग एकेडमी (एनआरटीएमए) का दल टीम लीडर पर्वतारोही हरीश जोशी, अमरजीत, सुनील कुमार के नेतृत्व में 27 मई को पिंडारी ग्लेशियर की ट्रैकिंग पर गया था। दल बुधवार को पिंडारी से लौट आया है। दल में तीन लोगों को छोड़कर सभी सदस्य पहली बार पिंडारी ग्लेशियर की ट्रैकिंग पर गए थे। छठी बार पिंडारी ट्रैक पर गए टीम लीडर हरीश जोशी ने बताया कि दल हम सब भारतवासी एक की थीम पर ट्रैकिंग पर गया था।
रूट की खस्ता हालत से दो-चार हुए ट्रैकर
बागेश्वर। पिंडारी ग्लेशियर के दीदार के लिए हर साल हजारों ट्रैकर देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचते हैं लेकिन ट्रैकिंग रूट की देखरेख की जिम्मेदारी संभालने वाला कपकोट का लोनिवि डिवीजन ट्रैकिंग रूट को दुरुस्त नहीं रख पा रहा है। पिंडारी की ट्रैकिंग से लौटे उत्तर रेलवे के ट्रैकरों ने बताया कि फुरकिया और द्वाली के बीच ट्रैकिंग रूट काफी खस्ता हालत में है। कहीं पर भी ट्रैकिंग रूट को दुरुस्त रखने के लिए लोनिवि की गैंग नहीं दिखाई दी। बताया कि फुरकिया और द्वाली के बीच ट्रैकिंग दल में शामिल एक बालिका खाई में गिरते-गिरते बची। उसे साथी ट्रैकरों ने पकड़ लिया। ट्रैकरों का कहना था कि ट्रैकिंग रूट की दशा सुधारी जानी चाहिए।
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मंगलवार को ही पिंडारी ट्रैकिंग रूट की देखरेख के लिए एई, जेई और पांच गैंग मजदूरों को भेजा गया है। गैंग ट्रैकिंग रूट पर नियमित रूप से तैनात नहीं रहती है। जब रास्ता खराब होने की जानकारी मिलती है, तो मजदूर भेजकर रास्ता ठीक कराया जाता है। फुरकिया और द्वाली के बीच रास्ते को दुरुस्त किया जाएगा।
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एसके पांडेय ईई लोनिवि कपकोट
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