बागेश्वर। उच्च न्यायालय द्वारा राज्य आंदोलनकारियों के लिए नौकरी में दस प्रतिशत आरक्षण को असंवैधानिक करार देने के फैसले से जहां अधिकांश राज्य आंदोलनकारी आहत हैं वहीं कुछ आंदोलनकारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
राज्य आंदोलनकारी नंदा बल्लभ भट्ट ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि आंदोलनकारियों ने अपने लिए नहीं बल्कि राज्य के हित में आंदोलन किया था। आरक्षण के बजाय अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले आंदोलनकारियों को सम्मान मिलना चाहिए।
राज्य आंदोलनकारी गोविंद सिंह का कहना है कि अलग राज्य के लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी है। आंदोलनकारियों को सम्मान देने के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई। राज्य आंदोलनकारियों को नौकरी में आरक्षण मिलना चाहिए।
राज्य आंदोलनकारी मेहरबान सिंह का कहना है कि उत्तराखंड राज्य के लिए बड़ा संघर्ष किया है। इस संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वालों और उनके बच्चों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था की गई। हर राज्य आंदोलनकारी को आरक्षण मिलना चाहिए।