बागेश्वर। गो क्रांति के अग्रदूत गोपाल मणि महाराज ने कहा कि गो सनातन संस्कृति का मूल है। गो के बिना हिंदू समुदाय के सोलह संस्कार अधूरे हैं। गाय महज एक मवेशी नहीं, बल्कि हिंदू संस्कृति का सार है। गाय को यथोचित सम्मान दिलाने के लिए उन्होंने जन मानस से आंदोलन की अपील भी की।
मणि महाराज सोमवार को नगर के एक होटल में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान गोपाल मणि महाराज ने अपार महत्ता होने के बावजूद भारतीय समाज में गो को यथोचित प्रतिष्ठा न मिलने पर चिंता जताई। कहा कि गो के कल्याण और सम्मान के लिए सभी को आगे आना होगा। खुद गो संरक्षण के साथ ही सरकार पर कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए दबाव बनाना होगा। गो कल्याण में ही भारत का कल्याण निहित है। उन्होंने गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने, बच्चों के लिए अनिवार्य रूप से गाय दुग्ध की उपलब्धता कराने, लावारिस गो वंश के संरक्षण, गो उत्पादों जैसे पंच गव्य के लिए उचित बाजार, गोबर गैस का प्रयोग बढ़ाने की योजना तैयार करने की पुरजोर वकालत की। कहा कि इन मांगों को लेकर आंदोलन चल रहा है। उन्होंने आम जन मानस को आंदोलन में शरीक होने की अपील भी की। इस दौरान यशवंत सिंह रावत, सूरत राम डंगवाल, आशीष सुमन सेमवाल, राजेश मोहन नौटियाल, विशंभर दयाल पांडे, लोकपाल देव, महेंद्र जोशी, राजेंद्र बिष्ट, गौरव कठायत, गिरीश पांडे, हरीश सोनी, नवीन दास, राधा लोहनी आदि थे।