बागेश्वर। भवन निर्माण, भूस्खलन और पानी की कमी के कारण जिले की पांच सिंचाई नहरों का अस्तित्व समाप्त हो गया है। विभाग ने इन सिंचाई नहरों के परित्याग के लिए शासन को पत्र लिखा है।
बागेश्वर जिले में वर्तमान में 138 सिंचाई नहरें हैं। इनमें से 50 नहरें कपकोट और 88 नहरें बागेश्वर डिविजन के पास हैं। सिंचाई विभाग के बागेश्वर डिविजन में पांच नहरें ऐसी हैं जिनका अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है। इनमें मंडलसेरा, खुनौली, दोफाड़, कफलखेत और बहेड़ी टैंक शामिल हैं। विभाग के मुताबिक इनमें से कुछ नहरों के आसपास भवन निर्माण होने से लंबे समय से उनका उपयोग नहीं हो रहा है। कुछ नहरें भूस्खलन के कारण पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इनका सुधारीकरण किया जाना भी संभव नहीं है। जबकि कुछ के स्रोत में पानी सूख गया है। लंबे समय से नहरों का कोई उपयोग नहीं होने के बाद विभाग ने इन नहरों का परित्याग करने के लिए शासन को पत्र भेजा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार शासन से अभी अनुमति नहीं मिली है। अनुमति मिलने के बाद ही बेकार पड़ी नहरों को औपचारिक रूप से छोड़ा जाएगा।
आधा दर्जन सिंचाई नहरें बंद
वर्तमान में बागेश्वर डिविजन के पास 88 सिंचाई नहरें हैं। इनमें से आधा दर्जन सिंचाई नहरें बंद हैं। इनमें गरुड़ की पौसारी, मर्तोली टैंक, लोहारी, पिंगलकोट और बागेश्वर में कलौली, हड़बाड़ टैंक शामिल हैं। सिंचाई नहरों के बंद होने से किसानों को सिंचाई सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है।
- अधिकांश सिंचाई योजनाओं में पानी कम हो गया है। कुछ नहरें आपदा काल में भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हो गई थीं। बंद नहरों को खोलने का काम चल रहा है। - महेंद्र सिंह मुस्यूनी, सहायक अभियंता सिंचाई विभाग बागेश्वर।