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लिलियम की 1200 स्टिक दिल्ली भेजी

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बागेश्वर के लीती में लिलियम के स्टिक हल्द्वानी भेजने के लिए लाए फूल उत्पादक। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जिले के शामा, लीती, बड़ी पन्याली क्षेत्र के लिलियम फूल के उत्पादकों को फूलों की बिक्री को लेकर कुछ आस बंधी है। फूल न बिकने से परेशान उत्पादकों की सहायता के लिए उत्तराखंड विकेंद्रीकृत जलागम परियोजना (ग्राम्या) आगे आई है। ग्राम्या के सहयोग से लिलियम के 1200 स्टिकों की पहली खेप हल्द्वानी के व्यापारी के माध्यम से दिल्ली भेजी है।
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क्षेत्र में शामा, लीती, बड़ी पन्याली में बड़े स्तर पर लिलियम की खेती होती है। 2019 से ग्राम्या के सहयोग से लिलियम की खेती कर रहे लोग लिलियम के स्टिक दिल्ली में बेचते थे। बीते वर्ष लॉकडाउन के कारण फूल नहीं बिक पाए थे। दानपुर किसान एकता समिति लीती के अध्यक्ष राजेंद्र कोरंगा, सचिव भूपेंद्र कोरंगा, कोषाध्यक्ष धना कोरंगा ने कहा कि पिछले वर्ष लॉकडाउन के कारण भारी नुकसान झेलना पड़ा। इस बार भी नुकसान की आशंका थी। ऐसे में ग्राम्या मदद के लिए आगे आया है। रविवार को ग्राम्या के सहयोग से लीती गांव से लिलियम के 1200 स्टिक हल्द्वानी के फूल व्यवसायी को भेजे हैं। हल्द्वानी के व्यापारी लिलियम के स्टिक बिकने के लिए दिल्ली भेजेंगे। ग्राम्या के अधिकारियों ने लिलियम के फूलों को बिकवाने का भरोसा दिया है।
जानवरों को खिलाने लगे फूल तो अमर उजाला आगे आया
बागेश्वर। शामा, लीती में कई उत्पादकों ने लिलियम के पौधे काटकर जानवरों को खिला दिए थे। अमर उजाला फूल उतत्पादकों की समस्या को लगातार उठाता रहा है। रविवार के अंक में भी फूल उत्पादकों की व्यथा पर विस्तार से डालते हुए प्रमुखता से खबर प्रकाशित की है। फूल उत्पादकों ने अमर उजाला के प्रयासों की सराहना की है।
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शामा, लीती, बड़ी पन्याली और नौकुड़ी में लिलियम की खेती होती है। इन गांवों के किसानों ने पिछले वर्ष 20 हजार बल्ब (बीज) रोपित किए थे। उन्हीं बल्बों में इस बार भी फूल खिल रहे हैं। हल्द्वानी के व्यापारी के माध्यम से लिलियम के स्टिक दिल्ली भेजे जाएंगे। - एलएस रावत, उप परियोजना प्रबंधक ग्राम्या बागेश्वर
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