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महिलाओं की आमदनी बढ़ाएगा पपीता

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बागेश्वर के चीराबगड़ में पपीते के पौधे लगाते कास्तकार। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान उन्नत और व्यवसायिक खेती के प्रति जागरूक होने लगे हैं। कपकोट के तमाम क्षेत्रों में मशरूम, केसर, स्ट्रॉबेरी, लिलियम और कीवी की खेती इसका प्रमाण है। चीराबगड़ की महिलाएं इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए पपीते की खेती में स्वरोजगार खोज रही हैं। महिलाओं ने चीराबगड़ को पपीता उत्पाद का हब बनाने की ठानी है। गांव की 11 महिलाओं ने उत्तराखंड विकेंद्रीकृत जलागम परियोजना (ग्राम्या) के सहयोग से एक एकड़ जमीन में पपीते के एक हजार पौधे रोपे हैं।
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चीराबगड़ गांव में ग्राम्या की पहल पर किसानों ने पपीते की खेती को रोजगार के विकल्प के तौर पर चुना है। जिला पंचायत सदस्य प्रभा गढ़िया के नेतृत्व में गांव की 11 महिलाओं ने अपने खेतों में ‘ताइवान रेड लेडी’ प्रजाति के पौधे रोपे हैं। जिपं सदस्य ने बताया कि पारंपरिक खेती से लोगों को लाभ नहीं हो रहा था। इस कारण खेत बंजर हो रहे थे। ग्राम्या ने ग्रामीणों को नया विकल्प प्रदान किया है। वहीं विभाग की ओर से पौधे, कीटनाशक, प्लास्टिक शीट और तकनीकी ज्ञान दिया गया है। ग्राम्या ने जिला पंचायत सदस्य को पपीते की खेती के बारे में जानकारी दी गई है। उन्होंने स्वयं भी अपने खेतों में पपीते के पौधे रोपे हैं।
विकल्प के तौर पर सब्जी उगाई
बागेश्वर। चीराबगड़ की महिला किसान पपीते की फसल तैयार होने तक विकल्प के तौर पर बैंगन, शिमला मिर्च, भिंडी आदि सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं, ताकि सब्जी बाजार में बेचकर रोजमर्रा का खर्च चला सकें।
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इन महिलाओं ने रखा पपीता उत्पादन के क्षेत्र में कदम
जिला पंचायत सदस्य प्रभा गढ़िया, हंसी देवी, शोभा देवी, देवकी देवी, पानुली देवी, गोविंदी देवी, राधा देवी, धना देवी, नीमा देवी, नीमा गढ़िया, गीता देवी।
35 रुपये का पौधा, एक साल में तैयार हो जाएगी फसल
बागेश्वर। ग्राम्या के उप परियोजना प्रबंधक एलएस रावत ने बताया कि पपीते की पौध रामनगर से मंगाई गई है। एक पौधे की लागत 35 रुपये है। एक साल के बाद पौधा फल देने लगेगा। तीन वर्ष तक पपीते की फसल ग्रामीणों को मिलती रहेगी। बताया कि एक पौधे से एक बार में 35 से 40 किलो तक फल मिलेगा। ग्रामीणों की मेहनत और देखरेख पर सब कुछ निर्भर करता है। अगर अच्छी फसल हुई तो ग्रामीणों को इसका बढ़िया लाभ मिलेगा। वहीं कपकोट के अन्य गांवों में भी पपीते की पैदावार का रास्ता खुलेगा।
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