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दूध से हो रहा बदरीनाथ भगवान का अभिषेक

Mon, 08 Jul 2013 07:51 PM IST
गोपेश्वर/प्रमोद सेमवाल
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श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलते ही अपने पैतृक गांवों को पहुंचने वाले बामणी और माणा गांवों के ग्रामीण इन दिनों दिन-रात बदरीविशाल की सेवा में ही जुटे हैं।
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इन ग्रामीणों ने बदरीनाथ के कपाट बंद होने तक धाम में ही डटे रहने का फैसला किया है। ग्रामीण रोज सुबह बदरीनाथ भगवान को दूध अर्पित कर रहे हैं और तुलसी की माला पिरोकर बदरीविशाल को चढ़ा रहे हैं।

दशकों से माणा और बामणी गांव के भोटिया जनजाति के लोग बदरीनाथ के कपाट खुलते ही अपने पैतृक गांवों में लौट जाते हैं। शीतकाल में जब छह माह तक बदरीनाथ क्षेत्र बर्फ से ढक जाता है तो माणा गांव के ग्रामीण गोपेश्वर, नैग्वाड़ क्षेत्र में और बामणी गांव के ग्रामीण पांडुकेश्वर क्षेत्र में प्रवास करते हैं।
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ग्रामीणों के पास है अधिकार माणा के ग्रामीणों को श्रावण माह में बदरीनाथ मंदिर में दीये जलाने और कपाट बंद होने के दौरान घी में भिगोए कंबल को बदरीनाथ को चढ़ाने का अधिकार दिया गया है।

वहीं, बामणी गांव के ग्रामीणों को धाम में भोग और आरती का अधिकार है। ग्रामीण यहां अपनी काश्तकारी भी करते हैं। ये ऊनी वस्त्रों का निर्माण, आलू, राजमा आदि का उत्पादन कर इसे शीतकाल में निचले क्षेत्रों में बेच देते हैं। बामणी गांव के ग्रामीण धाम के कपाट खुलते ही अपने मवेशियों सहित धाम में पहुंच जाते हैं।

बद्रीनाथ में दूध बेचकर चलाते हैं रोजगार
वे बदरीशपुरी में दूध बेचकर व अन्य छोटा मोटा कारोबार कर अच्छा पैसा कमा लेते हैं। आपदा की इस घड़ी में ग्रामीण अब विष्णु भगवान की सेवा भक्ति में लगे हुए हैं। धाम में मौजूद करीब तीन सौ स्थानीय ग्रामीण प्रतिदिन बदरीविशाल को दूध अर्पित कर रहे हैं।

भगवान के श्रृंगार के लिए ग्रामीण प्रतिदिन तुलसी वन से तुलसी की माला पिरोकर ला रहे हैं। बामणी गांव की सुनीता, सुनील और मनोज बताते हैं कि वे प्रतिदिन भगवान बदरीविशाल का दूध से अभिषेक करा रहे हैं। साथ ही धाम की आरती में भी शामिल होने पहुंच रहे हैं।

बदरीविशाल की भक्ति में डूबे ग्रामीण
कमला और सुमन देवी का कहना है कि यात्रा के दौरान वे बदरीनाथ की दुकानों में दूध बेचते थे, लेकिन अब यात्रा ठप पड़ जाने से वे इस दूध को बदरीविशाल को चढ़ा रहे हैं। बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल का कहना है कि बामणी और माणा गांवों के ग्रामीण प्रतिदिन धाम में बदरीविशाल की सेवा में लगे हुए हैं। ग्रामीणों की आजीविका संकट में होने के बावजूद वे बदरीनाथ की सेवा में लगे हुए हैं।
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