‘चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है...’, गुलाम अली की इस गजल ने आयुष कोटवाल को मुंबई का ‘टिकट दिला दिया। दिल्ली में हुए ऑडिशन में आयुष ने यह गजल गाकर ‘द वॉइस ऑफ इंडिया’ में एंट्री पा ली। 10 साल के आयुष की पारिवारिक स्थिति काफी कमजोर है।
रामनगर के लखनपुर निवासी प्रकाश कोटवाल के छोटे बेटे आयुष कोटवाल को बचपन से ही गाने-बजाने का शौक रहा है। जिम कार्बेट पब्लिक स्कूल में कक्षा एक से आयुष गिटार बजा रहा है और गा रहा है। आयुष एक दिन संगीत की दुनिया में अपना नाम कमाएगा, यह हर किसी को पता था।
2014 में रामनगर में आयोजित उत्तराखंड उत्सव में आयुष को बेस्ट सिंगर चुना गया। आयुष के चाचा अशोक कोटवाल ने बताया कि उन्होंने टीवी पर एक शो का विज्ञापन देखा। जिसके बाद आयुष ने शो के लिए ऑडिशन दिया। दिल्ली में हुए ऑडिशन में आयुष ने गुलाम अली की गजल ‘चुपके-चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है...’ गाई। तीन राउंड के बाद आयुष का चयन ‘द् वाइस ऑफ इंडिया’ में हो गया। आयुष के पिता की फास्ट फूड की दुकान है, जबकि माता गृहणी हैं।
दुकान में जमती है महफिल
अक्सर रात में दुकान में ही गाने की महफिल सजती है। जहां पूरा परिवार एकत्र होता है। इस दौरान आयुष वहां गाना गाता है। आयुष के चाचा और पापा को भी गाने का शौक है। उन्होंने आयुष का हर कदम पर साथ दिया। आयुष गाने के साथ ही गिटार, तबला, माउथ आर्गन और ड्रम भी बजाता है।
उत्तराखंड उत्सव स्थानीय कलाकारों की पहली सीढ़ी
फ्रैंड्स वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष नवीन नेगी ने बताया कि वे 2003 से रामनगर में उत्तराखंड उत्सव का आयोजन करा रहे हैं। इस प्रतियोगिता के कई विजेता देश और प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।