मानदेय समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश भर की आशाओं ने विधानसभा कूच किया। पुलिस ने रिस्पना पुल से पहले ही बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारी आशाओं को रोक लिया। इसके विरोध में आशाएं वहीं धरने पर बैठ गई। पुलिस ने आशा कार्यकत्रियों को गिरफ्तार कर लिया।
करीब तीन घंटे पुलिस लाइन में रखने के बाद पुलिस ने देर शाम उन्हें रिहा कर दिया। बृहस्पतिवार को प्रदेश के अलग अलग हिस्से से दून पहुंची आशाएं नेहरू कॉलोनी में एकत्रित हुई। यहां से वह जुलूस की शक्ल में विधानसभा कूच के लिए निकली। हालांकि उनकी संख्या पदाधिकारियों के दावे से खासी कम रही।
पुलिस बैरिकेडिंग लगाकर रोकती रही प्रदर्शनकारियों को :
पुलिस ने रिस्पना पुल से पहले ही बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक लिया। यहां कुछ देर पुलिसकर्मियों के साथ बहस करने के बाद आशाएं वहीं धरने पर बैठ गई। उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट डा. ललित नारायण मिश्र के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन की प्रांतीय अध्यक्ष शिवा दुबे ने कहा कि सरकार आशाओं के काम को लेकर लापरवाह बनी हुई है। आशाएं प्रदेश के हेल्थ सिस्टम को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है।
गर्भवती महिलाओं का प्रसव के समय तक ध्यान रखने से लेकर टीकाकरण, पोलियो अभियान और परिवार नियोजन तक की गतिविधियों में आशाएं सहयोग कर रही हैं। लेकिन, उन्हें इसके मुताबिक इंसेंटिव या मानदेय नहीं मिल रहा है।
हेल्थ सेक्टर में निजी सहभागिता बढ़ाए जाने पर नाराजगी:
उन्होंने हेल्थ सेक्टर में निजी सहभागिता बढ़ाए जाने के निर्णय पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने अन्य स्कीम वर्कर्स की तर्ज पर मानदेय, वर्ष 2012, 2013 व 2015 की प्रोत्साहन राशि का एकमुश्त भुगतान, बोनस का भुगतान और 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशें लागू करने की मांग की। बाद में पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले गई।
करीब तीन घंटे रखने के बाद पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया। प्रदर्शन करने वालों में सीटू के प्रांतीय महामंत्री वीरेंद्र भंडारी, जिला सचिव लेखराज, कलावती चन्दोला, सीमा, हंसी नेगी, किरन जगवाण, प्रमिला, सुमन, मनप्रीत कौर, कुंवरी देवी, मीना बुटोला, शशि नेगी, बबली, ममता समेत अन्य आशाएं शामिल रही।