चार साल पहले चेन्नई में आवासीय भवन निर्माण के दौरान हादसे की चपेट में आई आंध्रप्रदेश की संवासिनी की याददाश्त लौटी तो उसका परिवार भी मिल गया। तेलगू में उसने गांव का आधा-अधूरा नाम बताया था जिसके आधार पर गूगल पर गांव सर्च किया गया तो मिल गया।
बाद में उसके परिजनों का भी पता चला, जब इस संवासिनी के परिजन आए तो नारी निकेतन में रह रही एक दूसरी संवासिनी के घर की भी निशानदेही हो गई। वह आंध्रप्रदेश के ही किसी गांव की रहने वाली है। हालांकि उसके गांव के बारे में अभी पूरी तरह से छानबीन की जानी है।
बता दें कि मूक-बधिर संवासिनी प्रकरण का अमर उजाला के खुलासा करने के बाद नारी निकेतन प्रबंधन सक्रिय हो गया। इसका नतीजा है कि एक के बाद एक संवासिनियों को अपना घर मिल रहा है।
सोशल साइट्स पर डाली डिटेल तो मिला गया संवासिनी ब्यौरा:
आंध्रप्रदेश की यह संवासिनी चार साल पहले लापता हुई थी। कालसी में वह बीते साल अगस्त में लावारिस हालत में मिली थी। उसे नारी निकेतन लाया गया। सिर पर चोट के कारण उसकी याददाश्त चली गई। इलाज हुआ तो याददाश्त वापस आ गई।
अपर सचिव समाज कल्याण मनोज चंद्रन ने बताया कि सोशल साइट्स पर संवासिनी के ग्राम पंचायत के ग्रुप पर उसका डीटेल डाला गया तो ब्यौरा मिल गया।
उसके गांव के कुछ लोग देहरादून में नौकरी करते हैं। इससे उसके घरवालों से संपर्क में आसानी हो गई। उन्होंने बताया कि संवासिनी शनिवार को अपने बेटे और परिचितों के साथ चली गई।