अमरोहा। दहेज के खातिर विवाहिता को जिंदा जलाकर मारने के मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश विकास सक्सेना ने सास व नंद समेत तीन महिलाओं को उम्रकैद व दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि, अदालत ने साक्ष्य के अभाव में पति को दोषमुक्त करार दिया।
गजरौला के मुहल्ला आजाद नगर में रहने वाले भगत सिंह ने वर्ष 2004 में बेटी अंजू का विवाह लोहिया नगर के महर सिंह पुत्र फकीरा से किया था। हैसियत के मुताबिक दान दहेज देकर बेटी की विदाई की थी, लेकिन दहेज ससुरालियों का नजर में नहीं आया। नतीजा, ससुराल में अंजू को प्रताड़ित किया जाने लगा।
31 मार्च 2004 को संदिग्ध परिस्थितियों में ससुराल में आग से झुलसी अंजू की मौत हो गई थी। मायके वालों की तहरीर पर पुलिस ने पति समेत सास चंद्रवती, नंद मीनू व करीबी रिश्तेदार मायादेवी पत्नी हरि सिंह के खिलाफ दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। हत्यारोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। हालांकि, बाद में सभी को कोर्ट से जमानत पर रिहाई मिल गई थी।
ससुराल में दहेज हत्या का यह मामला विशेष सत्र न्यायाधीश विकास सक्सेना की अदालत में विचाराधीन था। सोमवार को केस में अंतिम जिरह के दौरान सहायक अभियोजन अधिकारी चंद्रशेखर की दलीलें और पत्रावली के अवलोकन के बाद अदालत ने सास चंद्रवती, नंद मीनू व मायादेवी को दोषी मानते उम्रकैद की सजा सुनाई। जबकि, सबूतों के अभाव में पति महर सिंह को बरी कर दिया।