रानीखेत (अल्मोड़ा)। केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में शनिवार को रानीखेत के युवाओं ने नैनीताल बैंक से एसडीएम कार्यालय तक नारेेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। उन्होंने संयुक्त मजिस्ट्रेट के माध्मय से राष्ट्रपति को ज्ञापन भी भेजा।
ज्ञापन में युवाओं ने पूर्व में हुई भर्ती की लिखित परीक्षा कराने की मांग की, वहीं अग्निपथ योजना को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को या तो वर्दी दे या अर्थी। युवाओं के संभावित प्रदर्शन को देखते हुए भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात था।
शनिवार सुबह 12 से अधिक युवा नैनीताल बैंक के पास एकत्रित हुए। युवाओं ने संयुक्त मजिस्ट्रेट कार्यालय तक नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार उनका भविष्य खत्म करना चाहती है। चार साल के बाद सेवानिवृत्ति देकर युवा कैसे अपना भविष्य संवारेंगे। कई युवाओं का कहना था कि उन्होंने दो साल पहले हुई भर्ती में भाग लिया और कई परीक्षण पास करने के बाद उनकी लिखित परीक्षा नहीं हुई है। इन हालातों में कैसे युवा सरकार की बातों का विश्वास करें। पहले लिखित परीक्षा कराई जानी चाहिए। कई युवा भर्ती की आयु सीमा भी पूरी कर चुके हैं। कहा कि लिखित परीक्षा निरस्त कर युवा सदमे में हैं और सरकार सेना भर्ती के लिए अग्निपथ जैसी योजना लागू कर रही है, जो युवाओं के हित में कतई नहीं है। प्रदर्शन करने वालों में सूरज कार्की, सोनू सिद्दीकी, अंकित, योगेश, मुकेश, मंजुल कुमार, बिट्टू आदि शामिल रहे।
अग्निपथ को राष्ट्रहित में वापस लें सरकार: उलोवा
अल्मोड़ा। उत्तराखंड लोक वाहिनी की बैठक में वक्ताओं ने अग्निपथ योजना को राष्ट्रहित में वापस लेने की मांग की। उन्होंने हल्द्वानी में अग्निपथ का विरोध कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज की भी निंदा की। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय सेना कोई रोजगार नही एक सैन्य परंपरा है। सैन्य परिवारों का सेना के साथ एक पारंपरिक जुड़ाव है। भारतीय सेना एक परिवार की तरह काम करती है। भारत की यूरोप, अमेरिका आदि देशों से तुलना करना इसलिए गलत है कि उन देशों और भारत की सामाजिक परंपराओं में बहुत अंतर है। उन्होंने सरकार से सेना मे संविदा नहीं बल्कि पूर्णकालिक भर्ती करने की मांग की। अध्यक्षता रेवती बिष्ट और संचालन दयाकृष्ण कांडपाल ने किया। बैठक में जगत रौतेला, पूरन तिवारी, जंगबहादुर थापा, अजय मित्र, कुणाल तिवारी, अजय मेहता, बिशन दत्त जोशी, हरीश मेहता, हारिस मुहम्मद आदि थे।