रानीखेत (अल्मोड़ा)। राज्य में पांचवें विधानसभा चुनाव दहलीज पर खड़े हैं। नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई हैं, लेकिन वर्षों से तमाम समस्याओं से जूझ रही ग्रामीण महिलाएं इस बार मुखर हैं। उनका कहना है कि वोट मांगने वालों से उम्मीद है कि वे पहाड़ के पानी और जवानी को पहाड़ में रोकने की कोशिश करेंगे।
आर्थिकी की रीढ़ खेती किसानी हाशिये पर है। सरकारें आए दिन तमाम घोषणाएं और दावे करती हैं, लेकिन ना तो जंगली जानवरों पर अंकुश लगा पाई और ना ही विभागों के माध्यम से कास्तकारों को कोई राहत। बच्चों के लिए रोजगार नहीं है, ऐसे में उन्हें दो रोटी के लिए तराई का रूख करना पड़ रहा है। अब बहुत हो गया, पहले सरकार पहाड़ के समग्र विकास की नीति बनाए। उनका कहना है कि ग्रामीण महिलाएं जागरूक हो गई हैं और अपने वोट का इस्तेमाल करना अच्छी तरह से जानती हैं। इस बार सोच समझकर मतदान किया जाएगा। वोट करेंगी तो अपने बच्चों के भविष्य के लिए, चौपट होती खेती किसानी के लिए और पटरी से उतरती शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए।
-राज्य बनने 21 साल हो गए हैं, लेकिन पहाड़ी राज्य की अवधारणा को लेकर बने राज्य में पहाड़ को ही बिसरा दिया गया है। यहां न तो खेती किसानी के लिए नीति बनी और ना ही पहाड़ के पानी और जवानी को रोकने के प्रयास हुए। पलायन के कारण पहाड़ बेजार हैं। वह लोग अब जागरूक हो चुकी हैं, पहाड़ के समग्र विकास करने वाली सरकार को चुनेंगी।-ममता बिष्ट, सौनी।
-पहाड़ में युवाओं के लिए अच्छे शिक्षण संस्थान नहीं हैं, जिस कारण युवा लड़की हो चाहे लड़का पलायन करने को विवश हो रहे हैं। खेती किसानी की हालत आप देख ही रहे हो। अब महिलाएं जागरूक हो चुकी हैं। झूठे आश्वासनों और छलावे पर नहीं आएंगी। पहले पहाड़ के समग्र विकास की बात होगी तब जाकर सरकार अस्तित्व में आएगी। अंजलि नेगी, रानीखेत।
-सरकारों ने अभी तक पहाड़ों के विकास के लिए कोई भी ठोस कार्य नहीं किए हैं। बच्चे पढ़ लिखकर बेकार घूम रहे हैं। हर घर की हालत एक जैसी है। महंगाई आसमान छू रही हैं। जंगली जानवरों के कारण खेती किसानी चौपट हो चुकी है। अब सरकार को पहाड़ के विकास की बात करनी होगी। महिलाएं जागरूक हो चुकी हैं।-किरन रावत, ताड़ीखेत।
-हर पांच साल में नेताओं को जनता की याद आती है, लेकिन जनता के लिए नेतागण क्या करते हैं। अब पूरा हिसाब नेताओं और सरकारों को देना होगा। पहाड़ में कहीं भी चले जाओ खेती किसानी पूरी तरह से हाशिए पर आ गई है। जंगली जानवरों की रोकथाम नहीं हो रही है। बच्चों का भविष्य पहाड़ में कैसे सुरक्षित होगा। कमाने के लिए बाहर तो जाना ही पड़ता है। पहाड़ की जवानी और पानी को यहीं रोकने की बातें बेकार हैं।-रेखा भट्ट।
ममता बिष्ट सौनी- फोटो : RANIKHET