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महिलाएं परिवार की धुरी, वह स्वस्थ रहेंगी तो पूरा परिवार रहेगा स्वस्थ

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अल्मोड़ा में अपराजिता 100- मिलियन स्माइल्स के तहत आयोजित गोष्ठी में शपथ लेतीं महिलाएं। संवाद - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। महिलाएं परिवार की धुरी होती हैं। यदि वह स्वस्थ रहेंगी तो पूरा परिवार स्वस्थ रहेगा। आज शिक्षा के प्रचार- प्रसार से देश में शिक्षित महिलाओं की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही। वह पढ़ लिखकर नौकरियां करने लगी हैं।
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अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत लोधिया में हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह बात कही। बालिका शिक्षा और महिला स्वास्थ्य विषय पर हुई गोष्ठी में कमला भंडारी ने कहा कि आज समय बदल गया है। महिलाएं घर परिवार के साथ ही आत्मनिर्भर बन रही हैं। व्यावसायिक भूमिका और परंपरागत भूमिकाओं को एक साथ निभाना एक महिला के लिए प्राकृतिक और कृत्रिम रूप से बहुत कठिन हो जाता है पर महिलाएं आज इतनी मजबूत हो गई है वह इन दोनों भूमिकाओं का बखूबी निर्वहन कर रही है।
कला लटवाल ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में महिलाएं स्वरोजगार कर स्वावलंबी बन रही हैं लेकिन उनके उत्पाद के लिए बाजार उपलब्ध न होने के कारण महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इन महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकारों को उन्हें बाजार उपलब्ध कराने चाहिए। सुनीता बिष्ट ने कहा कि परिवार को खुशहाल बनाने में महिलाओं की अहम भूमिका होती है। परिवार चलाने की जिम्मेदारी भी उन पर सबसे अधिक रहती हैै।
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दीपा लटवाल ने कहा कि महिलाएं स्वस्थ होंगी तो आने वाला नया मेहमान (शिशु) भी स्वस्थ रहेगा। महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति खुशहाल रहना पड़ेगा। संचालन सामाजिक विकास और प्रबंध समिति के शंभू दत्त जोशी ने किया।
बेटा-बेटी में कोई भेदभाव न करें। बेटी की शिक्षा भी उतनी ही जरूरी है जितनी बेटे की। बेटी शिक्षित होगी तो वह हर जगह शिक्षा का प्रकाश फैलाएगी। -प्रीति मिश्रा
महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। स्वास्थ्य ठीक रहेगा तो पूरा परिवार स्वस्थ रहेगा। किसी भी बीमारी को छुपाएं नहीं। अपने नजदीक के अस्पताल में जाकर उपचार कराएं। -गीता पांडे
महिला बच्चे की पहली गुरु होती है। महिला शिक्षित होगी तो वह अपने बच्चों की शिक्षा दीक्षा पर बेहतर ध्यान देगी। अपने बच्चों को समाज को समझने का बेहतर नजरिया दे सकती है।
नमिता बिष्ट
बेटी को भी वहीं शिक्षा, वही अधिकार, वही सम्मान दें जो बेटे को दिया जाता है। पहले परिवार में इस भेदभाव को खत्म करना होगा तब समाज में बेटी इसे खत्म करेगी।
माधवी मेहरा
ये रहीं मौजूद
सुनीता पांडे, स्मिता बिष्ट, दीपा कांडपाल, कमला तिवारी, हेमा कांडपाल, हेमलता लटवाल, दीपा भंडारी, प्रेम लटवाल समेत देवली, लोधिया, चौसली, चौमू, लाट, बर्शिमी आदि गांवों की महिलाएं।
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