रानीखेत (अल्मोड़ा)। जवान बेटे की पार्थिव देह घर के आंगन में पहुंची तो हर आंख नम थी और हर शख्स शहीद की एक झलक पाने को बेकरार था। बेटे बृजेश की मौत की खबर से सुधबुध खो बैठी मां सच मानने के लिए तैयार नहीं थी पर नियति तो अपना खेल खेल चुकी थी। रानीखेत के बेटे ने देश की सेवा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। पर मां तो मां है, आखिर वह कैसे मान ले कि जिस बेटे को उसने नौ माह पेट में पाला, फिर अपनी गोद में खिलाया और पाल पोसकर बड़ा किया अब वह नहीं रहा। छुट्टी पर जब भी घर आता था तो मां को गोद में उठा लेता था लेकिन आज वही लाल घर के आंगन में बेजान पड़ा था। मां-पिता सहित अन्य परिजनों का करुण रुदन से हर शख्स भावुक था।
पूर्वी सिक्किम में सेना का वाहन खाई में गिरने से शहीद हुए 7 कुमाऊं रेजीमेंट के जवान बृजेश रौतेला (22) का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह दिल्ली से सेना की एंबुलेंस से गनियाद्योली पहुंचा। यहां से कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र के अधिकारी उनकी पार्थिव देह को लेकर ताड़ीखेत स्थित उनके आवास पहुंचे। सुबह से ही सैकड़ों लोग बृजेश के अंतिम दर्शनों के लिए पहुंच गए थे। पार्थिव देह के पहुंचते ही परिजनों और वहां मौजूद लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मां पुष्पा देवी, पिता दलवीर, भाई अमित और बहन कल्पना के आंसू थाम थम नहीं रहे थे। इसके बाद पार्थिव देह को पैतृक गांव सरना ले जाया गया, जहां खेराड़ेश्वर महादेव मंदिर स्थित श्मशान घाट पर सैकड़ों ग्रामीणों ने उन्हें पुष्प चक्र अर्पित किए। सूबेदार नरेंद्र सिंह, सूबेदार आनंद सिंह, नायम सूबेदार आनंद सिंह के नेतृत्व में सैन्य जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी।
जिगर के टुकड़े की पार्थिव देह देखकर बेहोश हुई मां
रानीखेत। जिगर के टुकड़े का पार्थिव देह देखकर मां पुष्पा देवी, बहन कल्पना का रो रोकर बुरा हाल था। वह बेटे से लिपटती और फिर बेहोश हो जाती। यह मंजर देखकर वहां मौजूद सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों की आंखें भी नम हो आई। हर कोई इस हृदयविदारक घटना से दुखी था। पिता दलवीर और बड़ा भाई अमित भी गमगीन थे। छोटे भाई की देह देख अमित की आंखें भी नम हो आई। सैन्य अधिकारियों ने उन्हें भी ढांढस बंधाया।
मौत हर किसी को आती है, शहादत अमर कर जाती है
शहीद का शव गांव पहुंचने पर भारत माता के जय, जब तक सूरज चांद रहेगा-बृजेश तेरा नाम रहेगा आदि नारों से ताड़ीखेत गूंज उठा। लोगों का कहना है कि यूं तो जो इंसान पैदा हुआ है उसका मरना तय है लेकिन देश सेवा के दौरान मिली शहादत इंसान को अमर कर जाती है। बता दें कि बृजेश 2019 में केआरसी में भर्ती हुआ थे। ट्रेनिंग के बाद वह जम्मू के कुपवाड़ा और असम के हासिमआरा में उनकी पोस्टिंग हुई। तीन महीने के लिए वह सिक्किम स्थित नाथुलापोस्ट पर तैनात थे। चौकी पर गोला-बारूद पहुंचाकर लौटते वक्त वाहन दुर्घटना में वह शहीद हो गए। उनके पिता पिता दलवीर सिंह भी भारतीय सेना में रह चुके हैं। उन्हें सेना मेडल से भी सम्मानित किया गया है।
सांसद टम्टा ने भी घाट पहुंचकर चढ़ाया पुष्पचक्र
रानीखेत। सरना गांव स्थित शमशान घाट पर क्षेत्रीय सांसद अजय टम्टा, ताड़ीखेत के क्षेत्र पंचायत प्रमुख हीरा रावत, मोवड़ी के जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि हेमंत रौतेला, भाजपा नेता डा. प्रमोद नैनवाल, ब्लाक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष गोपाल देव, चंदन सिंह बिष्ट, सोनू सिद्दीकी, भास्कर बिष्ट, प्रशासन की ओर से एसडीएम गौरव पांडे, तहसीलदार विवेक राजौरी सहित सैकड़ों की संख्या में लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी।
शहीद बृजेश के नाम पर सरना में गेट बनाएंगे ब्लाक प्रमुख
रानीखेत (अल्मोड़ा)। ताड़ीखेत के ब्लॉक प्रमुख हीरा रावत ने सरना गांव में शहीद बृजेश रौतेला के नाम से गेट बनाने की घोषणा की है। प्रवेश द्वार के लिए ब्लाक प्रमुख ने अपनी निधि से चार लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। उन्होंने कहा कि शहीद के गांव में स्मारक बनाने के लिए भी सरकार से मांग की जाएगी। स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरूस्त कराने के लिए प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने गांव के विकास के लिए हर संभव सहयोग का भी आश्वासन दिया।