रानीखेत (अल्मोड़ा)। प्रदेश में पांचवीं सरकार चुनने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद अब रूठे हुए लोगों को मनाने के बीच राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत प्रचार में झोंक दी है। रानीखेत सीट के साथ एक मिथक जुड़ा हुआ है। राज्य बनने के बाद हुए चुनाव में जिस दल का इस सीट से विधायक जीतकर गया, उस दल की प्रदेश में सरकार में नहीं बनती। 2022 में यह मिथक टूट पाएगा या नहीं यह देखना दिलचस्प होगा।
2000 में राज्य गठन हुआ। 2002 में पहले आम चुनाव हुए। इस चुनाव में रानीखेत सीट पर भाजपा, कांग्रेस के अलावा दो निर्दलियों ने भी खम ठोका। हालांकि मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच रहा। तब भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट ने कांग्रेस प्रत्याशी पूरन माहरा को दो हजार मतों से पराजित किया। हालांकि निर्दलीय नरेंद्र रौतेला और स्व. रमेश बंबइया ने भी लगभग चार-चार हजार मत प्राप्त किए। तब सरकार कांग्रेस की बनी। इसके बाद 2007 के आम चुनाव में भाजपा, कांग्रेस के अलावा बसपा के प्रत्याशी मैदान थे। भाजपा से फिर विधायक अजय भट्ट, कांग्रेस के युवा चेहरे तत्कालीन ताड़ीखेत के ब्लाक प्रमुख करन माहरा और बसपा से राज्य आंदोलनकारी स्व. पूरन डंगवाल मैदान में थे। इस चुनाव में कांग्रेस के युवा नेता करन माहरा ने भाजपा के दिग्गज अजय भट्ट को 253 मतों से हराया। इस बार सरकार भाजपा की बन गई। 2012 के चुनाव में एक बार फिर मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और बसपा के बीच हुआ। इस बार बसपा के स्व. डंगवाल ने चौंकाते हुए नौ हजार से अधिक मत प्राप्त किए। तब अजय भट्ट ने कांग्रेस विधायक करन माहरा को 78 मतों से हराया लेकिन प्रदेश में सत्ता कांग्रेस के पास चली गई। 2017 में इस सीट पर भाजपा के विधायक नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, कांग्रेस के करन माहरा और निर्दलीय डॉ. प्रमोद नैनवाल मैदान में थे। कांग्रेस नेता करन माहरा ने भाजपा के भट्ट को 49 सौ मतों से शिकस्त दी। इस सीट पर यह अब तक की रिकार्ड मतों से जीत दर्ज हुई। 2017 में भी मिथक कायम रहा, सरकार भाजपा की बन गई।
लोग बोले, जिस दल की सरकार उस दल का बने विधायक
रानीखेत। हॉट सीट के मिथक को लेकर एक बार फिर बहस चल रही है कि क्या इस बार रानीखेत में मिथक टूटेगा। लोगों का कहना है कि प्रदेश में जिस दल की सरकार बने, यहां से विधायक भी उसी दल का होना चाहिए। विधायक दूसरे दल का होने का असर विकास कार्यों पर पड़ता है। विधानसभा क्षेत्र केवल विधायक निधि पर ही निर्भर होकर रह जाता है। संवाद