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नुकसान तो हुआ लेकिन सूखते जलस्रोतों को मिला पुनर्जीवन

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रानीखेत क्षेत्र का एक प्राचीन नौला। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। चार दिनों तक लगातार हुई बारिश से क्षेत्र में नुकसान तो काफी हुआ है, लेकिन तेजी से सूखते पारंपरिक जल स्रोतों, नौलों धारों को बारिश ने पुनर्जीवन भी दे दिया है।
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अच्छी बारिश के अभाव में नदियों का जल स्तर भी लगातार घट रहा था, ऐसे में जलस्तर बढ़ने की उम्मीदें भी जाग गई हैं। रानीखेत तहसील क्षेत्र में ही अब तक 185 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है। इससे फसलों को भी नवजीवन मिलने की उम्मीद है।
लंबे समय से अच्छी बारिश नहीं हुई थी। इस कारण पारंपरिक जल स्रोत, नाले, धारे, नौले सूखते जा रहे थे। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का गंभीर संकट खड़ा होने लगा था।
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नदियों का जल स्तर भी लगातार घट रहा था। नदियों का जल स्तर बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन ने भी कोसी पुनर्जनन, कुंजगड़ नदी पुनर्जनन अभियान चलाया हुआ है। इधर 16 जून से पूरे क्षेत्र में लगातार बारिश शुरू हुई।
अनवरत बारिश से काफी नुकसान हुआ लेकिन बारिश से नौलों को पुनर्जीवन मिल गया। वहीं नदियों का जल स्तर बढ़ने की भी उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि अभी और बारिश होनी चाहिए, जिससे भविष्य में विकट जल संकट दूर हो सके।
-अच्छी बारिश हुई है। निश्चित तौर पर जल स्रोत रिचार्ज होंगे। हमने भी चलो गांव की ओर अभियान के तहत पानी संचय कार्यक्रम चलाया है। चाल खाल लबालब भरे हैं। हमारे गांव सुनाड़ी क्षेत्र में ही 210 एमएम बारिश रिकार्ड हुई है। - मोहन कांडपाल, संयोजक चलो गांव की ओर अभियान।
- बारिश के कारण पानी का संकट काफी हद तक कम हुआ है। मानसूनी बारिश है। आगे अच्छी बारिश होने की संभावना है। जल स्रोतों का रिचार्ज होना जरूरी है। बारिश फायदेमंद साबित होगी। - आनंद अग्रवाल, मौसम जानकार, रानीखेत।
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रानीखेत में हुई बारिश
16 जून - 18 मिमी
17 जून - 30 मिमी
18 जून - 35 मिमी
19 जून - 50 मिमी
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