घंटों लगती है लाइन, तब मिलता कुछ लीटर पानी
चारों गांवों के विद्यार्थियों का पढ़ाई के साथ पानी भरना भी मुख्य कार्य है जो दैनिक दिनचर्या में शामिल है। सुबह के समय विद्यार्थी के लिए परिजनों की पानी को जरूरत को पूरा करने इस प्राकृतिक जल स्रोत की दौड़ और इसके बाद विद्यालय की दौड़ लगाना मजबूरी बन गया है। वहीं भीड़ अधिक होने से यहां लंबी लाइन लगती है तब जाकर कुछ लीटर पानी उपलब्ध हो रहा है।
बोले लोग-
अब तक गांव के लिए कोई पेयजल योजना नहीं बन सकी है। हम सिर्फ प्राकृतिक जल स्रोत पर निर्भर हैं। जल्द गांव तक पानी पहुंचाने के दावे तो हो रहे हैं जो कब धरातल पर उतरेंगे किसी को पता नहीं है। -सुनीता, ग्राम प्रधान, ऊणी।
अब तक ग्रामीण प्राकृतिक जल स्रोत से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। सोचा था जल जीवन मिशन योजना के तहत हमारे घरों में भी नल से जल टपकेगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। -जीवन बुधानी, पूर्व प्रधान, ऊणी।
ऊणी ग्राम सभा को बयेड़ी पेयजल पंपिंग योजना से जलापूर्ति होनी है। योजना निर्माणाधीन है। अगले कुछ महीनों में गांव तक पानी पहुंचा दिया जाएगा। -भारत सिंह रावत, एई, जल निगम, रानीखेत।