अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले में लोगों की दिल की धड़कन सुनने के लिए वहां के अस्पतालों में कोई हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। कहीं पद ही सृजित नहीं है। कहीं पद सृजित है तो तैनाती नहीं है और कहीं इस पद को समाप्त कर भविष्य में तैनाती की उम्मीद भी खत्म कर दी गई है।अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले में कहीं भी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं हैं।
अल्मोड़ा के मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालों में एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। जिले में हृदय रोगियों को इलाज के लिए महानगरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। अल्मोड़ा में सरकारी और निजी अस्पताल की ओपीडी में आने वाले 400 मरीजों में से 100 से 120 दिल के मरीज होते हैं।अल्मोड़ा के सीएमओ डॉ.. आरसी पंत ने बताया कि जिले के अस्पतालों में कार्डियोलॉजिस्ट का पद सृजित ही नहीं है। पद सृजित कराने के लिए शासन को समय-समय पर प्रस्ताव भेजा जाता है।
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बागेश्वर जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ का पद सृजित तो है लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से पद रिक्त है। लोगों को हृदय संबंधी बीमारियों का इलाज कराने के लिए हल्द्वानी, दिल्ली या दून की दौड़ लगानी पड़ती है।सीएमओ डॉ. कुमार आदित्य तिवारी ने बताया कि हार्ट विशेषज्ञ के पद भरने के लिए एंजियोग्राफी लैब होनी जरूरी होती है। लैब नहीं होने के कारण पद रिक्त है। हृदय रोग के बारे में सामान्य जानकारी फिजिशियन ही जांच कर बता देते हैं जिसके बाद मरीजों को हृदय रोग विशेषज्ञ से जांच कराने की सलाह दी जाती है।
उधर, पिथौरागढ़ में आईपीएचएस (इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड) के मानकों में बदलाव के चलते कार्डियोलॉजिस्ट का पद ही खत्म कर दिया गया है। इससे सीमांत जिले में दिल के डॉक्टर की तैनाती का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। पिथौरागढ़ के सीएमओ डॉ. एचएस ह्यांकी के मुताबिक आईपीएचएस के मानकों के अनुसार पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद समाप्त हुआ है। पद सृजित होने के बाद ही दिल के डॉक्टर की तैनाती संभव है। वहीं मेडिकल कॉलेज पिथौरागढ़ के प्राचार्य डॉ. अजय आर्या ने कहा कि बेस अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद सृजित नहीं है। ऐसे में यहां इनकी तैनाती नहीं हो सकती। पद सृजित होने पर यह संभव है।