क्षेत्र में गिरने की हालत में पहुंचे दरख्त दुर्घटना का सबब बन हुए हैं, लेकिन इनके निस्तारण को लेकर छावनी परिषद और रक्षा संपदा विभाग के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही।
बुधवार तड़के यहां आबकारी धारे के पास बांज का सूखा पेड़ अचानक गिर गया। धारे से पानी लेकर जा रही एक महिला इसकी चपेट में आने से बाल-बाल बच गई। बीते दो वर्षों में यहां लगभग आठ पुराने दरख्त जमींदोज हो चुके हैं।
मालूम हो कि पिछले साल भी यहां आबकारी धारे के पास बांज के दो भारी भरकम सूखे पेड़ गिर गए थे, जिससे यहां पर स्थित शिव मंदिर और धारे को काफी नुकसान हुआ था। बुधवार तड़के एक पुराना बांज का पेड़ फिर जमींदोज हो गया, इससे नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन पानी लेकर जा रही आबकारी निवासी महिला पेड़ की चपेट में आने से बाल-बाल बच गई।
गत वर्ष रंगोली हाल के समीप चीड़ का पेड़ हल्की हवा के चलते जमींदोज हो गया था। इस घटना से एक मकान का लिंटर क्षतिग्रस्त हो गया था। इसी वर्ष अप्रैल अंतिम सप्ताह में यहां मालरोड पर चीड़ का भारी भरकम पेड़ गिरने से तीन नई कारें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। मालरोड, चर्च, केंद्रीय विद्यालय कालोनी, रोडवेज स्टेशन के पास इस तरह के पेड़ों की संख्या अधिक है। इधर छावनी परिषद के अधिकारियों का कहना है कि 54 सूखे पेड़ छावनी के पास और 40 पेड़ रक्षा संपदा विभाग के अंडर हैं। इनके निस्तारण की कार्यवाही चल रही है। छावनी उपाध्यक्ष मोहन नेगी ने कहा कि ऐसे दरख्तों के कारण परेशानी बढ़ रही हैं। कैंट और रक्षा संपदा विभाग को इनके निस्तारण को लेकर कार्यवाही करनी चाहिए।