शनिवार को पर्यटन नगरी तीन घंटे तक अराजकता के हवाले रही। अहिंसा के पुजारी के चौक पर लाठी, डंडे और लात-घूंस चले। बवाल को देकर आसपास के लोग भी दहशत में आ गए। इतनी देर तक शहर में न तो पुलिस फोर्स और न ही प्रशासन के जिम्मेदार अफसर मौजूद थे। हालांकि पांच बजे जब कोतवाल शहर में पहुंचे और उन्होंने मामला शांत कराया। टैक्सी चालकों ने पुलिस कांस्टेबल पर मारपीट का आरोप लगाते हुए गांधी चौक पर जाम लगाया था। इसी बीच चालकों का एक व्यक्ति से विवाद हो गया। बात बढ़ने पर दोनों पक्षों में लाठी-डंडे और लात घूंसे चले। बताया जाता है कि शहर का पुलिस फोर्स अल्मोड़ा राज्यपाल के कार्यक्रम में गया था।
शनिवार दोपहर केमू स्टेशन पर एक चालक का पुलिस कांस्टेबल के साथ विवाद हो गया। इससे नाराज टैक्सी यूनियन के पदाधिकारी एसडीएम कोर्ट पहुंच गये। एसडीएम के नहीं मिलने पर चालक गांधी चौक पर पहुंचे और उन्होंने जाम लगा दिया। इस दौरान उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने कांस्टेबल पर चालक के साथ मारपीट का आरोप लगाया। जाम के चलते दोनों ओर से वाहनों लंबी लाइन लग गयी। इस बीच सिर पर बोझ लेकर पैदल जा रहा एक व्यक्ति वहां खड़े वाहन से टकरा गया। इसी बात को लेकर नया विवाद शुरू हो गया। कुछ देर में वह व्यक्ति भी अपने साथियों को लेकर गांधी चौक पहुंच गया। विवाद बढ़ने पर मारपीट शुरू हो गई। हाथापाई, लात, घूंसे, लाठी, डंडे चलने लगे। लोग पुलिस और प्रशासन को फोन करते करते थक गए। सूचना पर ट्रैफिक पुलिस का दीवान और दो कांस्टेबल मामले को सुलझाने को पहुंचे।
मगर झगड़ रहे लोगों के सामने वे असहाय नजर आए। उन्होंने बताया कि अल्मोड़ा में एक कार्यक्रम के लिए कोतवाल, एसएसआई और कांस्टेबल गए हुए हैं, जबकि एसडीएम द्वाराहाट में हैं। तहसीलदार एसएस तोमर भी समझाने आए, लेकिन किसी ने उनकी नहीं मानी। पांच बजे कोतवाल पूरन लाल वर्मा मौके पर पहुंचे, उन्होंने सभी को कोतवाली बुलाया और दोनों मामलों में समझौता कराकर मामले का पटाक्षेप कर दिया।