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द्वाराहाट में स्याल्दे बिखौती मेला शुरू

Wed, 13 Apr 2016 12:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
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स्याल्दे बिखौती मेला द्वाराहाट - फोटो : अमर उजाला
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। पाली पछाऊं के ऐतिहासिक स्याल्दे बिखौती मेले का विमांडेश्वर मंदिर से रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आगाज हुआ। मुख्य अतिथि विधायक मदन बिष्ट, पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, ब्लॉक प्रमुख ममता भट्ट और मेला कमेटी के अध्यक्षों ने मेले का उद्घाटन किया।
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अतिथियों ने प्राचीन संस्कृति के संरक्षण के लिए सभी से मिलजुलकर आगे आने का आह्वान किया। देर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हुआ। देर रात को ऑल, नौज्यूला, गरख धड़े के नेतृत्व में ग्रामीण विमांडेश्वर मंदिर की परिक्रमा कर झोड़ा गायन करेंगे।

विमांडेश्वर मंदिर में स्याल्दे बिखौती मेले के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए विधायक मदन बिष्ट ने मेले को पाली पछाऊं की पहचान बताया, कहा कि इस मेले के माध्यम से संस्कृति को बचाने का हरसंभव प्रयास होगा। स्याल्दे मेला कमेटी की नगर पंचायत अध्यक्ष अध्यक्ष विमला शाह, बिखौती मेला कमेटी के अध्यक्ष रमेश पुजारी, पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने भी सभी से एकजुट होकर मेले को भव्य बनाने पर जोर दिया।
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उद्घाटन की पूर्व रात्रि रणां गांव के ग्रामीणों ने ढोल, नगाड़ों, निशानों के साथ मंदिर की परिक्रमा कर श्रंकार नृत्य के साथ झोड़ा गायन किया। मंगलवार की देर रात आल, नौज्यूला, गरख धड़े के नेतृत्व में ग्रामीण मंदिर की परिक्रमा करेंगे। रात्रि में अपने अपने डेरों में झोड़ा गायन होगा। सुबह नदी में स्नान भी किया जाएगा। 

द्वाराहाट। स्याल्दे बिखौती मेले के उद्घाटन पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए राइंका बटुलिया, जूहा रणा, इंटर कॉलेज सुरईखेत के बच्चों समेत लोकगायक प्रकाश कहाला, कौशल पांडे, चंदन बोरा अपनी अपनी टीमों के साथ विमांडेश्वर पहुंच गए हैं। देर शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गए हैं, जो कि देर रात तक चलेगा। 

द्वाराहाट। स्याल्दे बिखौती का मुख्य मेला 14 अप्रैल को द्वाराहाट में लगेगा। 13 अप्रैल को बट पुजै का मेला लगेगा। 15 को मीना बाजार सजेगी, जबकि 16 अप्रैल को मेले का समापन होगा। स्याल्दे बिखौती मेला कमेटी के सचिव नारायण रावत ने बताया कि ऐतिहासिक मेले की तैयारियां कमेटी ने पूरी कर ली है।

मेला देखने पहुंच रहे लोगों की सुविधाओं का ध्यान रखने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। आल, नौज्यूल, गरख धड़े के थोकदार और प्रधान नगाड़े, निशानों, ढाल, तलवारों के साथ वीर रस की हुंकार भरते हुए युद्ध कला की बारीकियां दिखाने को पूरी तरह से तैयार हैं।
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