गरुड़ के सीमावर्ती ग्राम पंचायत पप्या में टिन की छत के घर
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गरुड़(बागेश्वर)। आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील बागेश्वर और चमोली जिले के सीमावर्ती ग्राम पंचायत पप्या के ग्रामीणों ने आपदा से बचने के लिए अपने पत्थर छाया मकानों का स्वरूप बदल दिया है। गांव में अब नब्बे फीसदी मकानों में पाथर की जगह स्टील की चादरों दिखने को मिल रही हैं।
राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार गरुड़ का सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत पप्या भूस्खलन की दृष्टि से अति संवेदनशील है। वर्ष 1982 में बारिश के सीजन में गांव के सिराने का एक बहुत बड़ा पहाड़ दरक गया था, जिससे कई मकान ध्वस्त हो गए थे। उस समय शत प्रतिशत मकानों में दरारें आ गई थीं। तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने तब गांव को भूस्खलन की दृष्टि से अति संवेदनशील घोषित किया था। भूमि संरक्षण विभाग ने गांव के सिराने की पहाड़ी के पानी का बहाव का रुख बदलने के लिए कृत्रिम नाले का निर्माण किया था।
मालूम हो तब भूगर्भवेत्ता प्रो. खड़क सिंह वल्दिया ने गांव दौरा कर सरकार से गांव को अति संवेदनशील श्रेणी में रखने और गांव के विस्थापन की सलाह दी थी। विस्थापन तो हुआ नहीं, ग्रामीणों ने मकान का भार कम करने के लिए पत्थर की छत की जगह मकानों पर टिन की छत डालना शुरू कर दी। मकानों में टिन डालने के बाद अब भूकटाव कुछ कम हद तक हो रहा है। गांव के नव युवक मंगल दल के अध्यक्ष दिगंबर सिंह परिहार का कहना है कि गांव की मिट्टी बलवी है, बहुत कम ग्रामीण लिंटर वाला मकान बना रहे हैं। ज्यादातर लोग टिन की छत लगाना ही बेहतर समझ रहे हैं। प्रधान अंजू परिहार, उप प्रधान सुरेंद्र सिंह का कहना है कि ग्राम पंचायत ने भूकटाव को रोकने के लिए ग्राम पंचायत में कुछ पक्के नालों का निर्माण किया है। उन्होंने सरकार से भूकटाव को रोकने के लिए कृषि विभाग से कार्य योजना तैयार करने को कहा है।