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भिटौली बनाम सहानुभूति ने पकड़ा सल्ट उपचुनाव का रंग

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बरकिंडा में लोगों के बीच तथा संबोधित करती कांग्रेस प्रत्याशी गंगा पंचोली - फोटो : ALMORA
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। सल्ट विधानसभा उपचुनाव रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। इस बार उपचुनाव में भिटौली बनाम सहानुभूति के नाम पर लड़ा जा रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी गंगा पंचोली का ससुराल और मायका सल्ट के स्याल्दे ब्लॉक में है।
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वह अपने मायके वालों से चैत्र मास की भिटौली के रूप में वोट मांग रही हैं, जबकि भाजपा प्रत्याशी महेश जीना अपने छोटे भाई दिवंगत विधायक सुरेंद्र जीना के नाम पर वोट मांग रहे हैं।
पहाड़ में चैत्र मास की भिटौली का विशेष महत्व होता है, बेटी के मायके वाले चैत्र महीने में अपनी विवाहिता बेटी को उपहार में कुछ न कुछ देते हैं। गंगा अपनी सभाओं में बुजुर्ग महिलाओं, मातृशक्ति से भिटौली के रूप में वोट मांग रही हैं।
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उनका कहना है कि वह उनके घर की बेटी हैं और जमीन से जुड़ी हैं। वहीं महेश जीना का कहना है कि वह अपने भाई के अधूरे कार्यों को पूरा करेंगे। देखा जाए तो सहानुभूति का कार्ड दोनों मुख्य दलों के प्रत्याशी खेल रहे हैं।
भाजपा प्रत्याशी महेश जीना का कहना है कि 10 साल उनके छोटे भाई सुरेंद्र जीना यहां से विधायक रहे और उन्होंने अभूतपूर्व विकासकार्य किए है। उनके कई अधूरे विकास कार्यों को पूरा करना ही उनका मकसद है।
उधर, कांग्रेस की गंगा पंचोली का कहना है की पिछले 10 वर्षों के दौरान सल्ट क्षेत्र विकास की दृष्टि से 25 साल पिछड़ गया है। हालांकि वह यह भी जोड़ती हैं की दिवंगत विधायक सुरेंद्र जीना बेहद व्यवहार कुशल थे, लेकिन उन्हीं के नेतृत्व में सल्ट विकास की दौड़ से बाहर हो गया।
अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं, अल्ट्रासाउंड के लिए महिलाओं को 90 किमी दूर रानीखेत अथवा रामनगर, हल्द्वानी जाना पड़ रहा है। ये कैसा विकास है। इस क्षेत्र की सबसेे बड़ी समस्या पानी, सड़क, स्वास्थ्य की है। अब ऊंट किस करवट बैठता है ये आने वाले दो मई को पता चलेगा।
खोई जमीन तलाशने की जुगत में है उक्रांद
रानीखेत। सल्ट उपचुनाव में भाजपा, कांग्रेस के अलावा क्षेत्रीय दल उक्रांद भी अपनी खोई जमीन वापस पाने के मूड में है। यहां से उक्रांद ने कद्दावर राज्य आंदोलनकारी पान सिंह रावत पंदा को समर्थन देकर मैदान में उतारा है।
उक्रांद का कहना है कि भाजपा कांग्रेस पिछले 20 सालों में राज्य को स्थायी राजधानी तक नहीं दे सके। जबकि पर्वतीय राज्य के लिए उक्रांद ने संघर्ष किया और गैरसैंण को स्थायी राजधानी भी घोषित किया था। उपपा ने जगदीश चंद्र को मैदान में उतारा है। वह भी भाजपा, कांग्रेस की नाकामियों को लेकर जनता के बीच में हैं।
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