रानीखेत बाजार में घूमते लावारिश कुत्ते। संवाद
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। तमाम कोशिशों के बावजूद रानीखेत नगरवासियों को लावारिस कुत्तों के आतंक से निजात नहीं मिल पा रही है। नगर सहित कुंपुर लालकुर्ती, गनियाद्योली, विशुवा आदि क्षेत्रों में कुत्तों ने लोगों की नाक में दम किया हुआ है। कुत्तों ने 2019 में यहां गनियाद्योली में एक पांच वर्षीया बालिका को नोचकर उसकी जान ले ली थी, इसके अलावा खूंखार कुत्ते पूर्व में कई बकरियों को भी निवाला बना चुके हैं।
पूरे क्षेत्र में लावारिस कुत्तों का आतंक फिर से बढ़ने लगा है। कई अभियानों के बावजूद कुत्तों की बढ़ती जनसंख्या रुक नहीं रही है। जबकि छावनी परिषद की तरफ से बधियाकरण अभियान भी चलाया गया। रानीखेत नगर में सैकड़ों कुत्तों के झुंड सक्रिय हैं। यह कुत्ते राह चलते लोगों पर झपट जाते हैं, जिसके चलते बच्चों को अकेले स्कूल भेजने में भी डर लगा रहता है। चार साल पहले 21 फरवरी को गनियाद्योली में राजेंद्र भारती की पुत्री लावन्या को घर के पास खेत पर कुत्तों के झुंड ने नोच डाला। नौ दिन तक बालिका अस्पताल में संघर्ष करती रही। बाद में बालिका ने दम तोड़ दिया। इसके बाद गनियाद्योली में ही एक अन्य बालिका को भी कुत्तों ने नोच डाला। हालांकि समय पर उपचार मिल जाने के कारण उसकी जान बच गई। कुत्तों से ग्रामीणों को भी काफी भय बना हुआ है। अपने बच्चों और मवेशियों की जान का खतरा तक बना हुआ है। इधर, व्यापार मंडल, पूर्व व्यापार मंडल सहित तमाम पदाधिकारियों ने छावनी परिषद से इन कुत्तों से निजात दिलाने की मांग की है। वहीं, रानीखेत के सरकारी अस्पताल प्रशासन का कहना है कि रेबीज के इंजेक्शन पर्याप्त हैं। छावनी परिषद के स्वच्छता निरीक्षक एपी सिंह ने बताया कि समय-समय पर बधियाकरण अभियान चलाया जाता है।