अल्मोड़ा। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक के 27 सितंबर को जारी आदेश में शिक्षकों का अनापत्ति प्रमाणपत्र निरस्त कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने के आदेश पर राजकीय शिक्षक संघ ने आक्रोश जताया है। उन्होंने आदेश की निंदा की है।
राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष भुवन चिलवाल ने प्रेस को दिए बयान में कहा कि विगत 18 अगस्त से संघ प्रधानाचार्य विभागीय सीधी भर्ती परीक्षा निरस्त करने, शत प्रतिशत पदोन्नति, स्थानांतरण के साथ 34 सूत्रीय मांगों के लिए आंदोलनरत हैं जिसमें शिक्षक लगातार प्रधानाचार्य की सीधी भर्ती परीक्षा निरस्त कर पूर्व की भांति पदोन्नति से भरने की मांग कर रहे हैं। इस प्रकार के पत्र जारी कर महानिदेशक शिक्षकों के रोष को बढ़ा रहे हैं जिससे आंदोलन समाप्त होने के बजाए और अधिक उग्र होगा। उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों ने पूर्व में जो गलत वरिष्ठता निर्धारित की है उन्हें ठीक करने के बजाए शिक्षकों के विरुद्ध उत्पीड़नात्मक पत्र जारी कर शिक्षकों को डराने का कार्य किया जा रहा है। शिक्षक इस प्रकार के आदेशों से डरने वाला नहीं है। प्रांतीय कार्यकारिणी के निर्देश प्राप्त होते ही देहरादून में शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव किया जाएगा।
जिला मंत्री राजू महरा ने कहा कि शिक्षकों की वरिष्ठता निर्धारण का मामला 2012 से न्यायालय में विचाराधीन है। पूर्व में ट्रिब्यूनल ने विभाग को तीन माह में शिक्षकों की वरिष्ठता निर्धारण करने का आदेश दिया लेकिन विभाग ने ट्रिब्यूनल के आदेश पर भी कोई कार्रवाई नहीं की। कहा सरकार इस आंदोलन को जितना अधिक दबाने का प्रयास करेगी, आंदोलन उतना अधिक उग्र होगा।