अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना (एसएसजे) विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि सोबन सिंह जीना और नेपाल विवि मिलकर सांस्कृतिक विश्वकोष बना सकते हैं। हमारा विश्वविद्यालय इसमें पूरा सहयोग करेगा। कहा कि भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी के संबंध को नए रूप में समझने गढ़ने की आवश्यकता है।
भंडारी इंडो नेपाल रिलेशंस एंड उत्तराखंड इंडिया शेयर्ड हिस्ट्री एंड कल्चर विषय पर आयोजित तीन दिनी अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के समापन पर मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शोधार्थियों को भारत और नेपाल के बीच संबंधों, उनके बीच सदियों से चल रही साझा संस्कृति, इतिहास, समाज, कला आदि पर कार्य करने की आवश्यकता है।
जेएनयू की प्रोफेसर संगीता थपलियाल ने कहा कि भारत-नेपाल के बीच संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है। मीडिया एक-दूसरे के बीच समभाव बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्रीय सेवक संघ के अखिल प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि भारत की संस्कृति विश्व भर में आज भी अपनी छाप छोड़ रही है। हमें वेदांत की दृष्टि मिली है। अपना मन विशाल करके देखें।
सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर राजेश खरात ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच गहरा संबंध हैं। दोनों ही राष्ट्र सीमा तक न रहें बल्कि इधर-उधर भी जाएं। प्रोफेसर महेश शर्मा ने सभी का आभार जताया। समापन सत्र का संचालन अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद (नेपाल अध्ययन केंद्र) नई दिल्ली के डॉ. लवी त्यागी ने किया।
नेपाल के अतीत से वर्तमान तक की दी जानकारी
अल्मोड़ा। सेमिनार में भारत और नेपाल के समाज, संस्कृति पर देशी, विदेशी शोधकर्ताओं ने शोध पत्रों का वाचन किया। डॉ. दिव्येश्वरी जोशी ने मानस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान शीर्षक से शोध पढ़ते हुए नेपाल और भारत के सांस्कृतिक समानता की स्थितियों को प्रस्तुत किया।
शोधकर्ता देबकी कुमारी शाह ने विश्व में माहवारी के दिनों में महिलाओं की दयनीय स्थिति और उसके उन्मूलन के बारे में जानकारी दी। पद्मराज जोशी ने नेपाल के अतीत से वर्तमान तक, डॉ.भुवनेश्वर पनेरू ने लोकल फ्लेवर इन डोटेली देउदा सांग विषय पर शोध पत्र पढ़े।
प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ. दनी राम योगी ने की। फोकलोर, फोक प्रैक्टिस एंड ट्रेडिशन में विद्वानों ने पत्र पढ़े। एआरएसपी सचिव श्याम परांडे ने कहा कि सेमिनार में प्रस्तुत हुए पेपर तीन महीने में प्रकाशित किए जाएंगे।
सेमिनार में ये रहे मौजूद
सम्मेलन में विवि के निदेशक, शोध एवं प्रसार प्रोफेसर जगत सिंह बिष्ट, प्रो. प्रवीण बिष्ट, कला संकायाध्यक्ष प्रो. अनिल जोशी, विशेष कार्याधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह बिष्ट, सेमिनार आयोजक सचिव प्रो. विद्याधर सिंह नेगी, प्रो. नीरज तिवारी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. इला साह, डॉ. चंद्र प्रकाश फूलोरिया, प्रख्यात पुरातत्वविद् प्रो. एमपी जोशी, प्रो. निर्मला पंत, प्रेम कुमार भट्टराई, वाणिज्य एवं प्रबंधन संकायाध्यक्ष प्रो.केसी जोशी डॉ. राकेश साह, प्रो.एमएमजोशी, डॉ. भोज राज गौतम, डॉ. रमेश खत्री, डॉ. स्वेता सिंह, डॉ. रीतू चौधरी, राजेंद्र रावल, प्रो. माधव पोखरेल, प्रो. महेश शर्मा, प्रो. मदन मोहन जोशी, डॉ. सुरेश टम्टा, डॉ. वासुदेव पांडे, पंकज जोशी, डॉ. नवीन भट्ट, डॉ. ललित जोशी, डॉ रवींद्र पाठक, मोहन प्रसाद बिष्ट, डॉ. निहार नायक, डॉ. शैलजा पोखरेल, डॉ. गोकुल देउपा, डॉ. हरक बहादुर शाही, नारायणी भट्ट, लियाकत अली, डॉ. बिदुर चालीशे, डॉ दनीराम योगी, जीवन भट्ट आदि मौजूद थे।