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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने विकसित की बंदर भगाने की बंदूक

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विवेकानंद संस्थान में बंदर भगाने वाली बंदूक का प्रदर्शन करते वैज्ञानिकगण । - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा ने बंदरों को भगाने के लिए बंदूक (एग्री केनन गन) विकसित की है। इसकी कीमत टैक्स आदि सहित करीब साढ़े तीन हजार रुपये रखी गई है। इस बंदूक को कोई भी एक प्राइवेट कंपनी के माध्यम से खरीद सकता है। संस्थान के वैज्ञानिकों का दावा है कि यह बंदूक बंदरों को भगाने के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। मंगलवार को संस्थान में इस बंदूक का प्रदर्शन किया गया।
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बंदूक और कुछ अन्य उपकरणों के बारे में जानकारी देते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. अरुणव पट्टनायक ने कहा कि आज बंदर और जंगली सुअर आदि काश्तकारों की खेती को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की देखरेख में वैज्ञानिकों ने द्वारा विकसित बंदूक बंदरों को भगाने में काफी उपयोगी सिद्ध होगी।
जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय हैदराबाद के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभागाध्यक्ष प्रो. वासुदेव राव ने कहा कि जंगली जानवरों से बचाव के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की देख-रेख में बनी एग्री केनन गन परीक्षण में सफल पाई गई है।
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इन मशीनों की कार्यपद्धति के बारे में जानकारी दी। प्रधान वैज्ञानिक और नेटवर्क समन्वयक केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान जोधपुर के डॉ. आरएस त्रिपाठी ने कहा कि जंगली जानवरों से फसलों को बचाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य हो गया है। इसे देखते हुए वैज्ञानिक अनुसंधान में लगे हैं। इस अवसर पर डॉ. आरएस त्रिपाठी, डॉ. लक्ष्मीकांत, डा.जेके बिष्ट,राजेंद्र प्रसाद आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुषाग्रा जोशी ने किया।
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