चौखुटिया (अल्मोड़ा)। जिलाधिकारी अंशुल सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को वन पंचायतों के सरपंचों की बैठक हुई। सरपंचों ने वन पंचायतों की समस्याओं को जिलाधिकारी के समक्ष रखा।
बैठक में उत्तराखंड पंचायती वन नियमावली 2005 में किए गए बदलाव, वन पंचायतों की स्वायत्तता, सरपंचों के मानदेय और विभागीय कार्यों में उनकी भूमिका के संबंध में चर्चा की गई। सरपंचों ने वन क्षेत्रों में बढ़ते अतिक्रमण को चिन्हित कर हटाने, सरपंचों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था करने और जंगलों में लगने वाली आग की रोकथाम के लिए वन पंचायतों को बजट उपलब्ध कराने करने की मांग रखी। जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने कहा कि सरपंचों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने सरपंचों को आश्वासन दिया कि उनके लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
वन पंचायत क्षेत्रों में अतिक्रमण के मामलों में सख्त कार्रवाई होगी
जिलाधिकारी ने वन पंचायत क्षेत्रों में अतिक्रमण के मामलों में सख्त कार्रवाई करने की बात भी कही है। उन्होंने कहा कि जिले में 2,089 वन पंचायतें हैं। इसमें से 19 आरक्षित वन क्षेत्र और शेष सिविल भू–राजस्व क्षेत्रों में गठित हैं। वर्तमान में वन पंचायतों के संरक्षण और प्रबंधन के अधीन 49,648.49 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी दीपक सिंह, प्रदीप कुमार, संतोष कुमार पंत, अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्रा, अध्यक्ष गणेश जोशी, निशा जोशी, सीमा तिवारी और विभिन्न वन पंचायतों के सरपंच उपस्थित रहे। संवाद