अल्मोड़ा के एक स्थानीय दुकान से गुजिया खरीदते लोग
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अल्मोड़ा। होली का जिक्र हो और गुझिया की बात न हो, भला ये कैसे हो सकता है। बिना गुझिया के होली का त्योहार अधूरा है। यही वजह है कि होली पर बाजार में गुझिया की मांग बढ़ जाती है। इस बार गुझिया पर भी महंगाई की मार पड़ी है। पिछले वर्ष की तुलना गुझिया महंगी होने से लोगों की जेब ढीली हो रही है।
यूक्रेन-रूस युद्ध का असर होली पर भी दिख रहा है। तेल के दामों में वृद्धि से गुझिया भी महंगी हुई है। होली पर्व पर नगर के बाजार में दुकानें गुझिया से सजे हैं। रेडीमेड गुझिया को लोग पसंद कर रहे हैं। जिन लोगों को घरों में गुझिया बनाने का समय नहीं मिलता है, वह बाजार से रेडीमेड गुझिया ले जाते हैं। घर-घर में होल्यारों को गुझिया, आलू के गुटके परोसे जाते हैं। लोगों में होली पर्व के लिए काफी उत्साह है लेकिन गुझिया की मिठास पर भी महंगाई की मार पड़ी है। पिछले साल 340 से 360 रुपये प्रति किलो तक बिकी गुझिया इस साल 400 रुपये प्रति किलो में बिक रही है। इसकी मशीन की कीमत 10 से 30 रुपये है। काजू 800, किसमिस 400 रुपये प्रति किलो है। लाला बाजार में 150 साल से गुझिया का कारोबार कर रहे निखिल साह ने बताया कि खोया और तेल दोनों महंगे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल 1900 रुपये में बिका तेल का एक कनस्तर अब 2800 रुपये का हो गया है। शुगर फ्री गुझिया की कीमत 500 से 600 रुपये प्रति किलो है। गुझिया विक्रेताओं ने बताया कि महंगाई से नगर के गुझिया कारोबार पर विपरीत असर पड़ रहा है। खरीदारी में गिरावट आई है। पहले एक किलो गुझिया खरीदने वाला ग्राहक अब पाव भर ही खरीद रहा है। जरूरी होने पर आधा किलो खरीद रहा है। गुझिया बनाने में प्रयुक्त सामान के साथ ही इसके कारीगरों ने भी दाम बढ़ा दिए हैं।
केसर गुजिया भी लोगों की बनी पसंद
अल्मोड़ा। दुकानदार कहते हैं कि खोया की गुझिया की सबसे ज्यादा बिक्री हो रही है। केसर गुझिया भी पसंद की जा रही है। केसर गुझिया 500 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। इस गुझिया का रंग थोड़ा पीला और नारंगी हो जाता है। बाजारों में चॉकलेट गुझिया, फीकी गुझिया, बेक्ड गुझिया, स्ट्रॉबेरी गुझिया, चंद्रकला, वनीला गुझिया, शाही आदि रेडीमेड गुझिया पसंद की जा रही है।