अल्मोड़ा। नियमितीकरण समेत अन्य मांगों के लिए उत्तराखंड रोडवेज संविदा, विशेष श्रेणी कर्मचारी संगठन के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर अल्मोड़ा शाखा के कर्मचारी बुधवार रात से बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं। आक्रोशित कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को रोडवेज वर्कशाप परिसर में धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया।
धरना स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि संविदा विशेष श्रेणी कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए। नियमित न होने की दशा में समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए। सभी संविदा विशेष श्रेणी कर्मचारियों को प्रति माह 24 हजार रुपये वेतन दिया जाए। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल में संविदा, विशेष श्रेणी कर्मचारियों ने जान जोखिम में डालकर ड्यूटी की लेकिन अब सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है। कर्मचारी कई सालों से विभाग में सेवाएं देते आ रहे हैं लेकिन अब तक उनका नियमितीकरण नहीं हो रहा है। कई कर्मचारी नियमितीकरण की आश में सेवानिवृत्त के कगार पर है। उन्होंने कहा कि संविदा, विशेष श्रेणी कर्मचारियों की नियमितीकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक कर्मचारियों को न्याय नहीं मिलेगा आंदोलन जारी रहेगा। वहां पर शाखाध्यक्ष पुष्कर आर्या, शाखा मंत्री रवींद्र सिंह भंडारी, गुलाब सिंह, कृष्णा कोहली, गोविंद राम, शिवराज सिंह, मनोज जोशी, जीवन टम्टा, उमाशंकर आदि शामिल हैं।
अल्मोड़ा की 10 बसों के चक्के जाम
अल्मोड़ा। रोडवेज के संविदा, विशेष श्रेणी कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से बृहस्पतिवार को रोडवेज डिपो अल्मोड़ा की करीब 10 बसों के चक्के जाम रहे। बसें नहीं चलने से डिपो को करीब एक लाख से अधिक का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
रोडवेज स्टेशन से मिली जानकारी के मुताबिक हड़ताल के चलते डिपो की अल्मोड़ा-गुरुग्राम, अल्मोड़ा-बागेश्वर, अल्मोड़ा-चंडीगढ़, अल्मोड़ा-बेतालघाट-दिल्ली, अल्मोड़ा-लमगड़ा-दिल्ली, अल्मोड़ा-दिल्ली, अल्मोड़ा-देहरादून की दो, अल्मोड़ा-टनकपुर समेत एक अन्य बस का संचालन ठप रहा।
बसों का संचालन न होने से यात्रियों को दिक्कतें हो रही है। पहाड़ से मैदान को जाने के लिए रोडवेज एक मात्र साधन है। हड़ताल के दौरान परिवहन निगम को यात्रियों की समस्याओं को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए। ताकि यात्री वाहन की तलाश में इधर उधर न भटके।
- निधि बिष्ट, अल्मोड़ा
हड़ताल से यात्रियों को आवाजाही में दिक्कतें हुई। दूसरे वाहनों से यात्रा करने पर यात्रियों को जेब ढीली करनी पड़ी। डिपो में चालकों की कमी दूर की जानी चाहिए ताकि हड़ताल भी हो तो बसों का नियमित संचालन किया जा सके।
- कैलाश सिंह, अल्मोड़ा
डिपो में चालकों की कमी बनी हुई है। संविदा, विशेष श्रेणी कर्मचारियों के हड़ताल के चलते बसों का संचालन प्रभावित हुआ। बसें नहीं चलने से डिपो को आर्थिक नुकसान हुआ है।
- गीता पांडे, कनिष्ठ स्टेशन प्रभारी रोडवेज डिपो अल्मोड़ा