मांगें पूरी नहीं होने से रिस्कन घाटी के लोग नाराज
विभागों की कार्यप्रणाली को किया कठघरे में खड़ा
कहा, पांच साल बाद भी प्रस्तावों पर नहीं हुआ अमल
संवाद न्यूज एजेंसी
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। रिस्कन घाटी संघर्ष समिति की बैठक में पूर्व के प्रस्तावों पर कोई सार्थक कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई गई। कहा कि विभागों को पांच साल पहले भेजे गए प्रस्तावों पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि हर बार हुए आंदोलनों में झूठे आश्वासनों के माध्यम से गुमराह किया गया है। कहा कि अब संघर्ष समिति ग्रामीणों के साथ निर्णायक आंदोलन शुरू करेगी।
संघर्ष समिति अध्यक्ष हरवंश सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि 2015 में विभागों को समस्याओं के समाधान के लिए प्रस्ताव भेजे गए, उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसमें फल्द्वाड़ी बयेला के उद्गम स्थल दीपेश्वर मंदिर के समीप डैम निर्माण, पैठानी नहर एवं सहायक नहरों में फील्ड गूलों का निर्माण, बिमांडेश्वर बैराज की मरम्मत कार्य, वहां चैकडाम निर्माण, सौंदर्यीकरण कर उसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने आदि की मांग की गई है। बैठक में खीरोघाटी संघर्ष समिति के चंद्र शेखर जोशी, पैठानी प्रधान भावना देवी, रणां की देवकी देवी, सिमलगांव की चंपा देवी, कुंस्यारी के महेंद्र रावत, तिपौला के महेश सिंह रौतेला, नैंणी के पंकज तिवारी, बनोली के प्रधान प्रशांत, खलना की पूजा देवी, खलना की क्षेत्र पंचायत सदस्य आशा नेगी सहित भारी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे। संचालन जगदीश बुधानी ने किया।
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