अल्मोड़ा में केएमओयू की बस सेवा 1939 में शुरू हो गई थी हुई। शुरू में कुमाऊं में सिर्फ नौ बसों से केमू का संचालन प्रारंभ हुआ और आज पूरे कुमाऊं में केमू की 400 से अधिक बसें चलती हैं। अल्मोड़ा डिपो से हर रोज 70 से 80 बसों का संचालन होता है, लेकिन यहां न तो स्टेशन के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है और न ही यहां बसों के रिपेयर के लिए वर्कशॉप है।
अल्मोड़ा समेत पूरे पर्वतीय इलाके में आजादी से पहले केमू की बस सेवाएं ही उपलब्ध थीं। उस दौर में टैक्सी-जीप आदि का संचालन भी नहीं होता था। 1939 में अल्मोड़ा में केमू बस स्टेशन बना। शुरू में यहां से सिर्फ हल्द्वानी के लिए एक-दो बसें चलती थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोग पैदल ही यात्रा करते थे। 1950 के बाद बसों की संख्या में कुछ इजाफा हुआ। वर्तमान में अल्मोड़ा से केमू की 70 से 80 बसों का संचालन होता है। यहां से मुख्य तौर पर हल्द्वानी, नैनीताल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, रानीखेत, चौखुटिया, गंगोलीहाट, द्वाराहाट, शीतलाखेत, जैंती, भनोली, रामनगर, द्वाराहाट समेत अधिकांश ग्रामीण इलाकों को बसों का संचालन होता है।
जिन रूटों में रोडवेज की बसें नहीं हैं वहां भी केमू की बस सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। हाल के वर्षों में केमू ने अधिकांश रूटों में नई और अच्छी कंडीशन वाली बसें चलाई हैं। कई रूटों में छोटी बसें चल रही हैं जो बड़ी बसों की अपेक्षा तेज गति से भी चलती हैं। अल्मोड़ा में रोडवेज बस स्टेशन के निकट ही केमू स्टेशन भी स्थित है। केमू के पास रोडवेज की अपेक्षा बसें खड़ी करने के लिए अधिक स्थान उपलब्ध है, लेकिन स्टेशन के भवन की हालत जीर्ण हो चुकी है। स्टेशन प्रभारी बसंत बल्लभ चंदोला ने बताया कि अल्मोड़ा में बसों की मरम्मत के लिए वर्कशॉप नहीं है। बसों की मरम्मत आदि हल्द्वानी में ही हुआ करती है। उन्होंने बताया कि केमू के अंतर्गत अधिक पुरानी बसें संचालित नहीं होती और नियमानुसार फिटनेस के बाद ही बसों का ही संचालन किया जाता है।