राज्य में धार्मिक स्थलों के पर्यटन विकास की काफी संभावनाएं हैं। उत्तराखंड राज्य बने डेढ़ दशक से अधिक समय हो गया है। सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक स्थलों को सुविधा संपन्न बनाने के दावे जरूर कर रही है, लेकिन धरातल पर काम नहीं हो रहा है।
सोमेश्वर तहसील में स्थित दक्षिणी कैलाश आश्रम एड़ाद्यो मंदिर पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है लेकिन यह आज भी उपेक्षित है। ऊंची पहाड़ी में जंगल के मध्य में स्थित एड़ाद्यो मंदिर तक पहुंचने वाली सड़क में डामर तक नहीं हुआ है।
किंवदंती के अनुसार जंगल घास काटने गई महिलाओं को बांज के पेड़ के समीप बाबा महादेव गिरि महाराज बैठे दिखाई दिए। इसके बाद क्षेत्र के ग्रामीण वहां गए। बाबा ने ग्रामीणों से कहा कि यहां महादेव के मंदिर की स्थापना करो।
बाबा के आदेश पर ग्रामीणों ने बांज के पेड़ के समीप खुदाई की तो गणेश, शिव और पार्वती की मूर्ति निकली। यहां पर एड़ाद्यो मंदिर का निर्माण कर मूर्तियां स्थापित की।
सोमेश्वर, मनान, मजखाली, बिंता, बग्वालीपोखर क्षेत्र के लोगों की मंदिर पर गहरी आस्था है। अल्मोड़ा, बागेश्वर समेत प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से भी यहां काफी संख्या में भक्तजन सालभर पहुंचते हैं।
भक्तों के सहयोग से यहां धर्मशाला का निर्माण भी किया गया है। मंदिर के बाबा महादेव गिरि ने पहले यहां संस्कृत विद्यालय खोला। जो बाद में हल्द्वानी में बाबा महादेव गिरि संस्कृत महाविद्यालय के नाम से संचालित किया जा रहा है।
मंदिर के लिए लोद और पथरिया मनान से वन विभाग की पांच किमी कच्ची सड़क है, लेकिन लंबे समय बाद भी सड़क में डामर नहीं हुआ है। वहीं सोमेश्वर के समीप मल्ला खोली अर्जुन राठ से मंदिर तक पहुंचने के लिए छह से सात किमी पैदल मार्ग है। इस कारण श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।