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कभी सिटी ऑफ चर्चेज के रूप में प्रख्यात थी पर्यटन नगरी

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रानीखेत मालरोड का कैथोलिक चर्च। अमर उजाला - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। पर्यटन नगरी के नाम से मशहूर रानीखेत कभी सिटी ऑफ चर्चेज के रूप में भी प्रख्यात था। दरअसल 1869 में अंग्रेजों ने जब यहां छावनी बसाई तो कई गिरिजाघरों का भी निर्माण कराया। उन्होंने कुल नौ गिरिजाघर बनाए। सभी चर्च अपनी अद्भुत संरचना और विशिष्ट शैली के लिए प्रख्यात हैं। मालरोड का कैथोलिक गिरिजाघर गौथिक संरचना का शानदार नजारा है। सात हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित चौबटिया के सेंट मिसेल चर्च तो पूरे उत्तर भारत में प्रख्यात था। अब देखरेख के अभाव में अधिकांश चर्च जीर्ण-शीर्ण हो गए हैं।
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1869 में अंग्रेज हुक्मरानों की नजर रानीखेत की खूबसूरत वादियों पर पड़ी। यहां की आबोहवा और शांत वातावरण को देखकर अंग्रेज इतने खुश हुए कि उन्होंने यहां छावनी बसा डाली। बताते हैं कि इसी दौरान ईसाई धर्म के प्रचारक भी यहां पहुंचे, जो लोगों को मानव सेवा के लिए प्रेरित करते थे। इसके बाद यहां एक के बाद एक नौ चर्च बनाए गए। जिसके चलते पर्यटन नगरी को सिटी आफ चर्चेज के नाम से जाना जाने लगा।
चौबटिया स्थित सेंट मिसेल चर्च सात हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण पूरे उत्तर भारत में प्रख्यात था। इसका निर्माण 1882 में हुआ था। वर्तमान में यह चर्च सेना के अधीन है इसे अब कौटिल्य हाउस के नाम से जाना जाता है। मालरोड का कैथोलिक गिरजाघर गौथिक शैली का बेजोड़ नमूना है। 1885 में चौबटिया में सेंट बिंसेंट और 1899 में सेंट बोनावेंचर चर्च बनाए गए।
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सभी चर्चों में उस वक्त नियमित रूप से प्रार्थना सभाएं होती थीं। सभी गिरिजाघर विशिष्ट प्रस्तर शैली के बने हुए हैं। यहां कैथोलिक समुदाय के दो सेंट बिजेंट और सेंट बोनावेंचर और प्रोटेस्टेंट समुदाय के एंग्लिकन, मैथोडिस्ट, बेपटिस्ट, प्रेसबीटेरियन सहित कुल सात गिरिजाघर बनाए गए थे।
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