चिलियानौला में बर्फबारी के दौरान फोटो लेती युवतियां। संवाद
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। हालांकि अब जलवायु परिवर्तन सहित तमाम कारणों के चलते पर्यटन नगरी में बर्फबारी का दायरा सिमट चुका हो, लेकिन एक समय था जब यहां बर्फबारी होती थी तो एक फुट तक, हफ्तों तक जहां बिजली गुल हो जाती थी, वहीं पानी के लिए भी भारी फजीहत झेलनी पड़ती थी। मार्च माह को अमूमन गर्मियों के सीजन में शुमार किया जाता है, लेकिन यहां मार्च महीने में भी बर्फबारी हुई है। सात मार्च 1997 को एक फुट से अधिक बर्फ गिरी थी। कई हफ्तों तक बर्फ पिघल तक नहीं पाई थी। 1995 और 1996 में भी अच्छी बर्फबारी हुई थी। बृृहस्पतिवार को दो साल बाद रानीखेत में बर्फबारी शुरू हुई है। जानकारों का मानना है कि यदि रात तक बर्फबारी हुई तो एक फुट बर्फ का रिकार्ड टूट सकता है।
पर्यटन नगरी में मार्च माह में भी बर्फबारी हो चुकी है। सात मार्च 1997 में पूरे क्षेत्र में भारी बर्फबारी हुई थी। इस बार फिर उसी तरह का मौसम बन रहा है। सात मार्च को हुई उस बर्फबारी के चलते पूरे क्षेत्र में एक हफ्ते तक बिजली, पानी की व्यवस्था ठप हो गई थी, लोगों ने बर्फ के पानी को पिघलाकर काम चलाया था। बर्फबारी के चलते जहां विद्यालयों में छुट्टियां कर दी गई थी, वहीं बिजली व्यवस्था 15 दिन बाद बहाल हो सकी थी।
बर्फ से लकदक रानीखेत का लालकुर्ती क्षेत्र। संवाद- फोटो : RANIKHET
1997 में बर्फ से लकदक रानीखेत। फाइल फोटो- फोटो : RANIKHET