रानीखेत के जंगलों में आग लगने का सिलसिला तेज होने लगा है। रानीखेत सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रात भर जंगल आग से धधक रहे हैं। घिंघारीखाल, चमड़खान, चिलियानौला, चौकुनी सहित तमाम जंगल आग से राख हो चुके हैं, दिन भर छाई धुंध लोगों के लिए मुसीबत बन गई है।
वनों में लग रही आग के कारण अमूल्य वन संपदा भी खाक हो रही है। बांज, बुरांश के जंगल राख हो चुके हैं, कई स्थानों पर जंगल की आग बस्ती तक आ पहुंच रही है। आग बुझाने के लिए वन विभाग के पास संशाधन और मैन पावर दोनों की कमी आड़े आ रही है।
कई स्थानों पर नवरोपित पौधों को भी नुकसान हुआ है। उत्तराखंड वन पंचायत सरपंच संगठन के प्रवक्ता भूपाल भंडारी ने कहा है कि वन राष्ट्र की धरोहर हैं इसे नुकसान पहुंचाना कानूनी जुर्म है। उन्होंने कहा कि अराजक तत्व वनों को आग के हवाले कर रहे हैं। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह वनों की रक्षा करे। उन्होंने वन पंचायत सरपंचों से भी आग की घटनाओं पर नजर बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वनाग्नि के चलते वन्य जीवों और मानवों में संघर्ष बढ़ रहा है, इस पर नियंत्रण रखने के लिए सभी को वनों की सुरक्षा के लिए आगे आना चाहिए।