रेल बजट में पर्वतीय क्षेत्र को कोई महत्व नहीं दिए जाने पर कांग्रेस, उलोवा, उपपा आदि दलों के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है। उन्होंने कहा पूर्व में रेल सुविधाओं को लेकर होने वाले आंदोलनों में भाजपा के लोग बढ़चढ़कर हिस्सा लेते थे लेकिन आज जब केंद्र में भाजपा की सरकार आई तो एक बार फिर रेल बजट में पहाड़ की भारी उपेक्षा की गई है।
उलोवा के केंद्रीय अध्यक्ष डा. शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल के बाद पहाड़ में सर्वेक्षण के अलावा कुछ नहीं हुआ। पूर्व में रेल को लेकर होने वाले आंदोलनों में भाजपा के लोग काफी आगे रहते थे लेकिन अब उनकी सरकार ने पहाड़ के हितों की भारी उपेक्षा की है। उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में परिवहन सबसे बड़ी समस्या रही है। रेल बजट में इस बात का कोई ध्यान नहीं रखा गया। पहाड़ में कई इलाकों में लोग रेल के लिए लंबे समय से लड़ रहे हैं लेकिन बजट में इस बारे में एक शब्द नहीं कहा गया।
कांग्रेस नेता पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा है कि रेल बजट निराश करने वाला है। यूपीए सरकार के शासनकाल में उत्तराखंड की कई परियोजनाओं को राष्ट्रीय परियोजनाओं को शामिल किया गया था लेकिन मोदी सराकर ने इन योजनाओं के लिए कोई बजट आवंटन नहीं किया है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तराखंड की रेल परियोजनाओं के लिए बजट नहीं देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
द्वाराहाट के विधायक और संसदीय सचिव मदन सिंह बिष्ट का कहना है कि जनता ने भाजपा के पांचों सांसदों को बड़ी उम्मीद के साथ जीताकर भेजा था परंतु रेल बजट को देखने के बाद जनता के सपने चकनाचूर हो गए हैं। उनका कहना है कि रामनगर से चौखुटिया तक रेल लाइन बनाना सबसे आसान होता दूरी कम होने से लागत भी कम आती। पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी का कहना है कि रेल लाइन के मामले में आजादी के बाद से उत्तराखंड की जनता के साथ छलावे के सिवाय कुछ नहीं हुआ। कांग्रेस और भाजपा के नेता स्वयंभू रेल पुरुष तो बन गए परंतु अंग्रेजों के जाने के बाद एक इंच रेल लाइन बिछाने में भी कामयाब नहीं हो पाए।
उदासीनता पर भड़के आंदोलनकारी
बागेश्वर। रेल बजट में टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग समेत राज्य में प्रस्तावित रेल मार्गों के निर्माण के लिए बजट का प्रावधान न होने से लोग भड़क गए। गुस्साए लोगों ने जिला मुख्यालय पर जनाक्रोश रैली निकाली। इसमें शामिल लोगों ने लंबित मांग शीघ्र पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
गुस्साए आंदोलनकारी जोरदार नारेबाजी करते हुए टीआरसी गेट पर जमा हुए। यहां से उन्होंने नगर में नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। संघर्ष समिति की अध्यक्ष नीमा दफौटी ने कहा कि लोगों को आशा थी कि रेल मंत्री सुरेश प्रभु ब्रिटिशकाल से प्रस्तावित टनकपुर बागेश्वर रेल मार्ग के निर्माण के लिए बजट की घोषणा करेंगे, लेकिन बजट में प्रदेश की अनदेखी हुई। सत्तासीन पार्टी से जुड़े राज्य के सभी पांच सांसदों की चुप्पी भी जगजाहिर हो गई है।
उन्होंने रेलमार्ग निर्माण के लिए शीघ्र बजट की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी। रैली में महासचिव खड़क राम आर्य, प्रवक्ता हयात सिंह मेहता, ग्राम प्रधान मंजू बिष्ट, हरीश खेतवाल, देवकी मेहता, आनंदी नगरकोटी, मालती पांडे, डा. प्रताप गढ़िया, मदन टंगड़िया, डुंगर नेगी, कुशाल मेहता, प्रवीण दफौटी, पार्वती टंगड़िया, उमा माजिला, रेनु दफौटी, उमा गुरुरानी, सुनीता टम्टा, आनंदी परिहार, रीता कांडपाल, विद्या कांडपाल, चंद्रा कालाकोटी, ममता जोशी, उमा पंत थे।