सैलानियों की आमद बढ़ाने के लिए दलमोटी के जंगल में स्वीकृत मिनी अभ्यारण्य केंद्र अभी तक अस्तित्व में नहीं आ सका है। दलमोटी के सघन वन क्षेत्र की पांच हेक्टेयर भूमि में डियर पार्क, वर्ल्ड वॉचिंग, टाइगर रिजर्व, जंगल सफारी सहित तमाम कार्य प्रस्तावित हैं।
अभ्यारण्य बनने के बाद सैलानी जहां जंगल सफारी का लुत्फ उठाएंगे वहीं प्रकृति और वन्य जीवन को निहारने का उन्हें नजदीक से मौका मिलेगा। सैलानियों की आमद पर्यटन नगरी में निरंतर कम हो रही है। पर्यटक नैनीताल से आते हैं, रानीखेत में घूमने के बाद सीधे कौसानी का रुख कर देते हैं।
इससे पर्यटन नगरी का व्यवसाय चौपट हो रहा है। सैलानियों को आकर्षित करने के उद्देश्य से ही मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गत वर्ष दलमोटी के जंगल में मिनी अभ्यारण्य बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने वन का सर्वे कर अभ्यारण्य की संभावनाएं तलाशी और प्रपोजल बनाकर शासन को भेज दिया।
इसमें कुछ खामियां मिलने से इसे विभाग को वापस भेज दिया गया है। वन विभाग ने दलमोटी के जंगल की पांच हेक्टेयर 250 नाली भूमि में डियर पार्क, टाइगर रिजर्व, पैंथर पुल, ट्रैकिंग रूट, जंगल सफारी, वर्ल्ड वॉचिंग केंद्र सहित तमाम विकास कार्य प्रस्तावित किए हैं।
इसके लिए कुल पांच करोड़ रुपये का बजट बनाकर भेजा गया है। पैंथर पुल के माध्यम से सैलानियों को सीधे गोल्फ मैदान उतारने और ट्रैकिंग रूट और जंगल सफारी से सैलानी प्रकृति का दीदार करते हुए सीधे चौबटिया गार्डन के दर्शन करेंगे।
दलमोटी के अलावा पंतगांव, देवरापानी, ज्यूड़ा, सौनी के वन क्षेत्र को ईको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने की योजना है। इन जंगलों में ट्रैकिंग रूट भी विकसित किए जाने हैं। हालांकि फिलहाल यहां चाल, खाल बनाने का कार्य चल रहा है।
रेंजर दीवानी राम कहते हैं कि दलमोटी में मिनी अभ्यारण्य के लिए शासन को प्रपोजल बनाकर भेजा गया था, लेकिन प्रपोजल में कुछ खामियां पाई गई थीं, जिसके चलते फिलहाल वह वापस आ गया है। प्रपोजल में सुधार किया जा रहा है। संभवत: ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन तक यह अभ्यारण्य अस्तित्व में आ जाएगा।