पाताल भुवनेश्वर का शिव मंदिर
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राज्य पुरातत्व विभाग ने गंगोलीहाट के प्रसिद्ध पाताल भुवनेश्वर गुफा के बाहर की तरफ स्थित प्राचीन चामुंडा मंदिर और शिव मंदिर का जीर्णोद्धार करके उन्हें मौलिक स्वरूप में लाने के लिए 38 लाख रुपये की कार्य योजना बनाकर केंद्रीय संस्कृति विभाग को भेजी है। योजना के तहत इन दोनों मंदिरों के शिखर में बिजोरा बनाने के साथ ही इन्हें रिसेट भी किया जाएगा। यह दोनों मंदिर दसवीं शताब्दी में बने हैं।
गंगोलीहाट के निकट स्थित प्रसिद्ध पाताल भुवनेश्वर गुफा के बाहर की तरफ कत्यूरी काल में बना चामुंडा और शिव मंदिर हैं। पुरातत्व विभाग ने 1992 में इन दोनों मंदिरों और वहां रखी कई मूर्तियों को संरक्षण में ले लिया था। बताया गया है कि संरक्षण में लेने से पहले ही स्थानीय भक्तों ने धार्मिक भावना से प्रेरित होकर शिव मंदिर के ऊपर बिजोरा के स्थान पर सीमेंट की छत डाल दी।
इस कारण इस मंदिर का मौलिक स्वरूप बिगड़ गया। इसके अलावा वहां स्थित प्राचीन शिव मंदिर में भी दरारें आ गई हैं और कुछ स्थानों पर पत्थरों ने अपनी जगह छोड़ दी है। जिससे मंदिर को खतरा भी उत्पन्न हो रहा है। यही नहीं देखरेख नहीं होने से दोनों मंदिरों की दशा बिगड़ती जा रही है।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि कत्यूरी शासन काल के दौरान दसवीं शताब्दी में बने यह दोनों मंदिर पुरातत्व की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं। चामुंडा मंदिर वलभी शैली और शिव मंदिर नागर शैली का बना है। उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर परिसर में एक पुराना मंडप भी है। इसका भी जीर्णोद्धार किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में नौवीं और दसवीं शताब्दी की 29 मूर्तियां भी हैं। योजना के तहत इन मूर्तियों को प्रदर्शित करने के लिए पेडस्टल भी बनाया जाएगा। यह माना जा रहा है कि जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण की इस योजना को मंजूरी मिलने पर यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होगा।
कभी मंदिरों का समूह भी रहा होगा
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. चंद्र सिंह चौहान का मानना है कि जिस तरह के पाताल भुवनेश्वर गुफा के बाहर के परिसर में काफी समय पहले 29 मूर्तियां मिली हैं उससे यह माना जाता है कि यहां भी कभी मंदिरों का समूह रहा होगा।
दोनों मंदिरों को संरक्षित करने और मौलिक स्वरूप में लाने के लिए पुरातत्व विभाग ने 38 लाख की कार्य योजना तैयार करके राज्य सरकार के माध्यम से केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को भेज दी है। योजना के तहत दोनों मंदिरों के शिखर में बिजोरा लगाया जाएगा। जीर्णोद्धार के साथ ही मंदिरों को रिसेट भी किया जाएगा। ताकि मंदिर अपने मूल स्वरूप में आ सकें।- डॉ. सीएस चौहान, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी अल्मोड़ा