संकरे नाले से झरने को देखने जाते नौजवान।
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भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। विकासखंड भिकियासैंण के खुरेड़ी गांव स्थित जंगल में कुछ समय पहले खोजे गए प्राकृतिक झरने को अगर संरक्षित किया जाए तो यह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। रामनगर-कालाढूंगी रोड पर स्थित कार्बेट फॉल की तरह यहां भी पर्यटक गर्मी के सीजन में झरने का लुत्फ उठा सकते हैं।
भिकियासैंण बाजार से सात किमी की दूरी पर गगास नदी के किनारे रिखाड़ गांव की तलहटी में पौराणिक रक्षेश्वर महादेव शिव मंदिर से आगे खुरेड़ी गांव में एक गधेरा बहता है। यहीं पर 40 से 50 फुट की ऊंचाई से एक झरना गिरता है, जिसका पानी साफ और ठंडा है। झरना अस्तित्व में आने के बाद सैकड़ों लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं। इसी तरह धौलछीना में ऐतिहासिक संकुलाकार चोटी पर बसे मां विमलकोट मंदिर को भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। इस मंदिर से अल्मोड़ा बिनसर, आनंदी माई आश्रम, हरियाटापू, वृद्ध जागेश्वर आदि कई रमणीक स्थलों के दर्शन होते हैं। इस शक्ति पीठ को 1515 ईस्वी पूर्व का बताया जाता है। वहां चंद्रवंशी राजा जन अदालत लगाते थे, जिनके खंडहरों के अवशेष आज भी यहां मौजूद हैं। हर साल यहां मेले का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें दूरदराज के लोग भारी संख्या में पहुंचते हैं।